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लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में शनिवार को अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) ने अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। संगठन ने आरोप लगाया कि बाजार में कई उत्पादों पर मनमाने तरीके से एमआरपी तय की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ABGP ने सरकार से एमआरपी व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग की है। ABGP पिछले 53 वर्षों से उपभोक्ता जागरूकता और अधिकारों के लिए कार्यरत है। संगठन ने बताया कि देशभर में उसके 35 हजार से अधिक सदस्य सक्रिय हैं। संस्था मई महीने में पूरे देश में ‘उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम’ चला रही है, जिसके तहत लोगों को एमआरपी और फर्जी छूट के खेल के बारे में जागरूक किया जा रहा है। एमआरपी पूरी तरह से निर्माता नियंत्रित है प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय पर्यावरण आयाम प्रमुख डॉ. प्रमोद पांडेय ने मौजूदा एमआरपी व्यवस्था पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एमआरपी पूरी तरह से निर्माता नियंत्रित है और कानून में इसकी कोई ऊपरी सीमा तय नहीं है। इसी कारण कंपनियां अपनी इच्छानुसार कीमतें छापती हैं। डॉ. पांडेय ने यह भी बताया कि कई दवाओं और मेडिकल उपकरणों की कीमत उत्पादन लागत से कई गुना अधिक रखी जाती है। डॉ. पांडेय ने उदाहरण देते हुए बताया कि 3 रुपये की सुई 30 रुपये में बेची जाती है। इसी तरह, 25 हजार रुपये में आयात किया गया पेसमेकर 2 लाख रुपये तक में सूचीबद्ध होता है, और 4 लाख रुपये लागत वाला हृदय वाल्व 26 लाख रुपये तक के एमआरपी पर बेचा जा रहा है। संगठन ने दावा किया कि अस्पतालों और एजेंसियों के दबाव में कंपनियां अधिक एमआरपी प्रिंट करती हैं ताकि भारी मार्जिन दिया जा सके। ये रहे मौजूद डॉ. प्रमोद पांडेय ने जोर देकर कहा कि उपभोक्ताओं को एक पारदर्शी मूल्य व्यवस्था मिलनी चाहिए। इस प्रेस वार्ता में प्रांतीय अध्यक्ष यशपाल सिंह, प्रांतीय उपाध्यक्ष ओमकार पाण्डेय, संगठन मंत्री डॉ. राम प्रताप सिंह बिसेन, सचिव आशुतोष मिश्रा, कोषाध्यक्ष रमा शंकर अवस्थी और प्रचार आयाम प्रमुख विश्वनाथ मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
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ग्राहक पंचायत का आरोप- उत्पादों पर मनमानी MRP तय:सरकार से व्यवस्था में बदलाव और अधिकतम सीमा तय करने की मांग














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