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रेलवे स्टेशन ग्वालियर पर तीन साल से चल रहा पुनर्विकास कार्य यात्रियों के लिए सुविधा देने के बजाय फिलहाल परेशानी का कारण बनता जा रहा है। भीषण गर्मी के बीच स्टेशन के हालात ऐसे हैं कि यात्रियों की परीक्षा ट्रेन में बैठने के बाद नहीं, बल्कि स्टेशन पहुंचते ही शुरू हो जाती है। एंट्री गेट से लेकर प्लेटफॉर्म तक लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 43 से 44 डिग्री तापमान के बीच खुले आसमान के नीचे ट्रेन का इंतजार करना यात्रियों की मजबूरी बन गया है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 स्थित सर्कुलेटिंग एरिया में परेशानी की शुरुआत एंट्री गेट से ही हो जाती है। पार्किंग क्षेत्र के पास कई बार रास्ते में बैरिकेड्स और रस्सियां लगा दी जाती हैं, जिससे यात्रियों को सामान खींचते हुए लंबा रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ सफर करने वालों को अधिक दिक्कत उठानी पड़ रही है। प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के बाद स्थिति और मुश्किल हो जाती है। पुराने शेड हटाए जा चुके हैं, जबकि नए रूफटॉप का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में धूप से बचने के लिए बड़ी संख्या में यात्री इंक्वायरी हॉल और आसपास उपलब्ध छायादार स्थानों पर ठसाठस बैठने को मजबूर हैं। वहीं प्लेटफॉर्म 2 और 3 पर खुदाई होने से यात्रियों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कई लोग मलबे के आसपास बैठकर ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं। प्लेटफॉर्म-2 और 3 पर खुदाई से अफरा-तफरी, महिला यात्री गिरी प्लेटफॉर्म नंबर-2 और 3 पर खुदाई का काम चल रहा है। इससे यहां ट्रेनों के आने-जाने के दौरान अफरा-तफरी का माहौल बन रहा है। शनिवार को ताज एक्सप्रेस के दौरान भीड़ के धक्के से महिला प्लेटफॉर्म पर गिर गई। गनीमत रही कि वह ट्रेन की चपेट में नहीं आई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। । दो साल का प्रोजेक्ट अब चार साल तक खिंचने के आसार ग्वालियर रेलवे स्टेशन से हर दिन करीब 60 से 65 हजार यात्री सफर करते हैं। स्टेशन पुनर्विकास परियोजना पर करीब 535 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन दो साल में पूरा होने वाला काम अब चार साल तक खिंचने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि रेलवे अधिकारियों का दावा है कि 15 जून के बाद एल्यूमीनियम शीट लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा, जिससे यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है। मशीन के कंपन से प्लेटफॉर्म-1 की छत का प्लास्टर गिरा शनिवार सुबह प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर छत का प्लास्टर अचानक नीचे गिर गया। संयोग से जिस स्थान पर प्लास्टर गिरा वहां कोई यात्री नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। बताया जा रहा है कि केपीसी कंपनी द्वारा पुरानी संरचना तोड़ने का काम किया जा रहा है और मशीनों के कंपन से प्लास्टर गिरा।
इजराइल से सामान अटका, काम रुका रेलवे अधिकारियों के अनुसार प्लेटफॉर्म पर रूफटॉप स्ट्रक्चर का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, लेकिन उसमें लगने वाली स्काई-लाइट पॉलीकार्बोनेट सामग्री अभी नहीं पहुंची है। यह सामग्री इजराइल से मंगाई गई है। अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध की स्थिति के कारण इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। करीब छह हजार वर्गमीटर क्षेत्र में यह स्काई-लाइट लगाई जानी है, जिससे प्लेटफॉर्म पर स्थायी छाया की व्यवस्था हो सकेगी। प्लानिंग पर सवाल, काम की गति धीमी स्टेशन पर काम धीमी गति को लेकर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। परियोजना की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता (सीई) संतोष गुप्ता और डिप्टी सीई सुधीर पटेल के पास है, लेकिन काम की रफ्तार को लेकर रेलवे अधिकारियों तक ने कई बार नाराजगी जताई है। दरअसल, प्लेटफॉर्म नंबर-1 से लेकर 4 तक एक साथ काम शुरू किए जाने से व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं और निर्माण कार्य भी बिखर गया। इसलिए स्थिति बिगड़ी है। आंधी में उड़ी ग्रीन नेट, लगाएंगे अस्थायी शेड यात्रियों को धूप से राहत देने के लिए पहले ग्रीन नेट लगाई गई थी, लेकिन आंधी में वह उड़ गई। अब दोबारा अस्थायी शेड लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यात्रियों को परेशानी न हो।
-अनिरुद्ध कुमार, डीआरएम, झांसी मंडल
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एंट्री गेट से प्लेटफॉर्म तक पहुंचाना मुश्किल सफर:शेड गायब, रूफटॉप का काम अटका धूप और मलबे के बीच ट्रेन का इंतजार















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