फिल्म अभिनेत्री ट्विशा की मौत की जांच में नया मोड़ आया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर मिले दो निशानों के बाद आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं। परिजन का दावा है कि दोनों निशान ओवरलैप कर रहे हैं। इसे सामान्य फांसी के मामलों से अलग माना जा रहा
.
इन्हीं कारणों से परिजन दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग कर रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स की विशेषज्ञ टीम भोपाल में दोबारा पोस्टमॉर्टम करेगी। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मामले से जुड़े 5 अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। पढ़िए रिपोर्ट

जानिए जांच से जुड़े सवालों के जवाब
1. डबल लिगेचर मार्क पर सवाल
पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर दो समानांतर लिगेचर मार्क दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फंदा गर्दन पर दो बार लिपटा प्रतीत होता है। इसके बावजूद मौत का कारण सुसाइड बाय हैंगिंग दर्ज किया गया। परिजन का दावा है कि फांसी के सामान्य मामलों में ऐसे निशान कम मिलते हैं। अब दिल्ली एम्स की फॉरेंसिक टीम इन निशानों की दोबारा जांच करेगी।
2. फंदे की बरामदगी में देरी पर सवाल
पोस्टमॉर्टम के समय कथित फंदा न डॉक्टरों को सौंपा गया था और न पुलिस ने जब्त किया था। परिजन के सवाल उठाने के बाद 15 मई को फंदा बरामद किया गया। वकील अंकुर पांडेय ने सवाल उठाया कि अंतिम संस्कार के बाद फंदे की पुष्टि कैसे होती।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में फंदा आमतौर पर शव के साथ जांच के लिए भेजा जाता है। इस देरी पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।

घर का वह हिस्सा जहां ट्विशा की डेडबॉडी मिली।
3. शरीर पर मिले चोट के निशानों की जांच
पहली रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान दर्ज हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चोटें किसी ठोस वस्तु के प्रभाव से हो सकती हैं। बाएं हाथ की कोहनी और कलाई के बीच कई घाव भी दर्ज हैं।
रिपोर्ट में चोटों की गहराई पर सीमित जानकारी दी गई है। विशेषज्ञ अब दोबारा जांच में चोटों की प्रकृति का आकलन करेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, हड्डियों और मांसपेशियों की स्थिति से चोटों की गंभीरता का आकलन संभव है।
4. हायॉइड बोन सुरक्षित मिलने पर सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार, फांसी के कई मामलों में हायॉइड बोन या थायरॉयड कार्टिलेज प्रभावित होती है। रिपोर्ट में यह हिस्सा सुरक्षित बताया गया है। रिपोर्ट में टिशू में रक्त के निशान दर्ज हैं, लेकिन हड्डी सुरक्षित रहने पर विस्तृत टिप्पणी नहीं है। दूसरी पोस्टमॉर्टम जांच में इस पहलू की भी समीक्षा होगी। एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने फंदे और बेल्ट की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।

5. लंबाई के अंतर और मेडिकल पैनल पर सवाल
रिपोर्ट में ट्विशा की लंबाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। एम्स भोपाल की रिपोर्ट में लंबाई 166 सेंटीमीटर दर्ज है, जबकि परिजन 172 सेंटीमीटर बता रहे हैं। वकील अंकुर पांडेय ने रिपोर्ट की सटीकता पर सवाल उठाए हैं।

डिकंपोज हो चुके शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम बड़ी चुनौती
11 दिन पुराने शव से सबूत जुटाना दिल्ली एम्स की टीम के लिए चुनौती माना जा रहा है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. हर्ष शर्मा के मुताबिक, टीम पहले पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी और तस्वीरों का मिलान करेगी।
डॉ. शर्मा के अनुसार, डिकंपोजिशन शुरू होने के बावजूद यह जांच संभव है कि निशान सड़ने से बने हैं या जीवनकाल की चोटों के हैं। अब दिल्ली एम्स की रिपोर्ट से मौत की परिस्थितियों पर कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
















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