फाइलों में अटकी नौनिहालों की सुरक्षा:एक माह बाद बारिश, जिले के 255 स्कूल भवन जर्जर; छत से गिर रहा प्लास्टर, झांक रहे सरिया




जिले के शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के भवनों की मरम्मत समय पर नहीं होने से बारिश में फिर हालात बिगड़ेंगे। क्योंकि एक माह बाद बारिश का दौर शुरू हो जाएगा लेकिन भवनों की मरम्मत नहीं होने से वह आज भी जर्जर हालत में हैं। जिले के प्राथमिक और माध्यमिक दोनों मिलाकर 255 स्कूल जीर्णशीर्ण की स्थिति में हैं। जिनमें करीब 180 स्कूल ऐसे हैं, जहां बारिश के समय बैठना मुश्किल है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग गंभीरता से नहीं ले रहा है। प्राथमिक शाला आदिवासी बस्ती अजनौर में पिछले साल प्रस्ताव बनाया लेकिन अब तक मरम्मत नहीं हो सकी। ककरवाहा और बापू नगर चंदेरा में भी स्कूल भवन जीर्णशीर्ण हालत में पड़े हैं, इसके बावजूद स्कूलों की मरम्मत नहीं हो सकी। बाहर से तो रंगरोगन है लेकिन अंदर खुले सरिया, झड़ता पलास्टर बच्चों के लिए समस्या बने हुए हैं। जिले के अन्य स्कूलों की स्थिति भी ठीक नहीं है। विकासखंडवार स्कूलों की संख्या देखें तो बल्देवगढ़ में 234 प्राथमिक, 31 माध्यमिक और 74 एक शाला एक परिसर स्कूल हैं। जतारा में 227 प्राथमिक, 21 माध्यमिक और 91 एक शाला एक परिसर स्कूल संचालित हैं। पलेरा में 212 प्राथमिक, 29 माध्यमिक और 70 एक शाला एक परिसर स्कूल हैं। टीकमगढ़ विकासखंड में 228 प्राथमिक, 25 माध्यमिक और 21 एक शाला एक परिसर स्कूल हैं। अजनौर: सीलिंग पर नेट बांधना पड़ी शासकीय प्राथमिक शाला आदिवासी बस्ती अजनौर में भवन की स्थिति जर्जर है। स्कूल में तीन कमरे हैं लेकिन तीनों की हालत खराब है। बारिश के साथ-साथ आम दिनों में समस्या बनी रहती है। कमरे की सीलिंग से सीमेंट झड़कर नीचे गिरता है। जिससे कमरे के अंदर नेट (कपड़ा) बांधने को मजबूर होना पड़ा। बारिश में स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। पिछले साल बारिश में हालात बिगड़ने पर पॉलीथिन बांधकर काम चलाना पड़ा था। बच्चों को आंगनबाड़ी व पंचायत भवन में बैठाने की नौबत आ गई थी। ककरवाहा: सीलिंग के सरिया दिख रहे शासकीय प्राथमिक शाला ककरवाहा में बारिश के दौरान छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूल भवन की सीलिंग के सरिया दिखाई देने लगे हैं। बारिश में छत कई जगह से लीकेज होने लगती है। जिससे कमरों में पानी टपकता है। स्कूल में पांच कमरों में से चार की हालत खराब है। बारिश के समय बैठने योग्य नहीं हैं। इसी तरह स्कूल की किचिन भी जर्जर हो गई है। स्कूल में 250 से अधिक छात्र-छात्राएं दर्ज हैं, बारिश के दौरान छात्रों को सुरक्षित स्थान पर बैठाना चुनौती बन जाता है। स्कूलों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलते ही उनकी मरम्मत कराई जाएगी। जिन स्कूलों में पिछली बार समस्या बनी थी, उनको भी शामिल किया है। उम्मीद है कि बारिश के पहले कई स्कूलों की मरम्मत हो जाएगी। – पीआर त्रिपाठी, डीपीसी, शिक्षा विभाग, टीकमगढ़



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