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रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के सगौर गांव में शनिवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। कुएं में डूबने से तीन आदिवासी बच्चियों की मौत हो गई। प्रारंभिक चर्चा में जल संकट को हादसे की वजह बताया जा रहा था, पड़ताल में कई अलग तथ्य सामने आए हैं। शनिवार दोपहर गांव की बच्चियां कुएं की ओर गई थीं। बताया गया कि सबसे पहले तनु कुएं में उतरकर नहाने लगी। इसी दौरान वह गहराई में जाकर डूबने लगी और बचाने के लिए आवाज लगाने लगी। उसे बचाने के लिए उसकी बड़ी बहन आशा गोंड कुएं में उतरी, लेकिन वह भी पानी में समा गई। दोनों को बचाने के प्रयास में अमृता ने भी कुएं में छलांग लगा दी, लेकिन वह भी डूब गई। घटना को गांव की ही अमीना ने अपनी आंखों से देखा। वह घबराकर गांव पहुंची और लोगों को जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तीनों बच्चियों को कुएं से बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गांव में जल संकट जैसी स्थिति नहीं : सरपंच
घटना के बाद गांव में जल संकट की बात सामने आई थी। इसको लेकर की गई पड़ताल में पता चला कि सगौर गांव में वर्ष 2021 से नल-जल योजना संचालित है और घर-घर पानी पहुंच रहा है। ग्राम पंचायत रसीदपुर के सरपंच भगवान सिंह लोधी ने बताया कि तेज गर्मी के कारण इन दिनों वाटर लेवल कम हो गया है, इसलिए करीब आठ दिनों से गांव में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि बच्चियां केवल एक कोपा लेकर घर से निकली थीं और वे नहाने के उद्देश्य से कुएं तक पहुंची थीं। जिस कुएं में हादसा हुआ उसका पानी इतना गंदा है कि ग्रामीण उसका उपयोग पीने तो दूर, नहाने के लिए भी नहीं करते। 44 डिग्री तापमान में गिरा वाटर लेवल
पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री गिरीश कामले ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में वाटर लेवल तेजी से नीचे चला गया है। गांव में दो सरकारी बोर से पानी सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन पानी कम होने के कारण एक दिन छोड़कर सप्लाई की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सगौर गांव में नहीं बल्कि कई ग्रामीण इलाकों में बनी हुई है। हादसे के बाद गांव पहुंचा प्रशासन
घटना की सूचना मिलते ही गैरतगंज एसडीएम अंकित कुमार जैन, बेगमगंज एसडीओपी नीलम गुप्ता और थाना प्रभारी डीपी लोहिया मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। एसडीएम अंकित कुमार जैन ने बताया कि मृतक बच्चियों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए की सहायता राशि देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक ही परिवार की दो बेटियों की मौत
हादसे में जान गंवाने वाली तनु और आशा दोनों सगी बहनें थीं। उनके पिता अमृतलाल गोंड छोटे किसान हैं। परिवार में अब केवल उनका बेटा अमृत बचा है। वहीं तीसरी बच्ची अमृता के परिवार में भी एक भाई और बहन हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। एक साथ उठीं तीन अर्थियां, गांव की आंखें हुई नम
गांव में तीनों बच्चियों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। जब गांव से तीन मासूमों की अंतिम यात्रा निकली तो हर आंख नम हो गई। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा और लोग इस दर्दनाक हादसे को याद कर भावुक हो उठे।
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तीन बच्चियों की डूबने से मौत का मामला:कुएं में नहाने उतरी थीं, एक दिन छोड़कर आ रहा था नल-जल योजना से पानी















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