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मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव स्वास्थ्य निगरानी और उपचार के दो अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए गए। वन विभाग और विशेषज्ञ पशु चिकित्सा दल ने नर बाघ टी-159 और टी-125 का वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया। पहला मामला सरही परिक्षेत्र के सोंफ बीट का था। यहां लगभग 7 से 8 वर्षीय नर बाघ टी-159 के अग्रपाद में चोट, लंगड़ाहट और सुस्ती की सूचना मिली थी। जानकारी मिलते ही कान्हा प्रबंधन ने तत्काल विशेषज्ञ दल को मौके पर भेजा। स्वस्थ होने पर जंगल में छोड़ा परीक्षण के दौरान बाघ के पंजे के नाखून में पुरानी चोट और सतही घाव पाए गए। इनमें प्राकृतिक रूप से भराव की स्थिति देखी गई। चिकित्सकीय दल ने आवश्यक दवाइयां और सपोर्टिव मेडिकेशन देने के बाद बाघ को स्वस्थ हालत में जंगल में छोड़ दिया। दूसरा मामला मुक्की परिक्षेत्र के गायधर बीट स्थित सीएन-165 मिंकुर एनीकट क्षेत्र से सामने आया। यहां लगभग 8 वर्षीय नर बाघ टी-125 में सुस्ती और लंगड़ाकर चलने की जानकारी स्टाफ द्वारा दी गई थी। विशेषज्ञ दल ने बाघ को सुरक्षित तरीके से अचेत कर उसके जैविक नमूने लिए। प्रारंभिक जांच में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) सहित अन्य वायरल संक्रमणों की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई। परीक्षण में बाघ का स्वास्थ्य संतोषजनक मिला, जिसके बाद उपचार और निगरानी उपरांत उसे भी जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। दोनों मामलों में रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट के माध्यम से सीडीवी और अन्य संक्रमणों की जांच की गई। विस्तृत परीक्षण के लिए जैविक नमूने एसडब्ल्यूएफएच प्रयोगशाला जबलपुर भेजे गए हैं। यह पूरी कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), मध्यप्रदेश द्वारा गठित विशेषज्ञ दल के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस दल में एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर, डब्ल्यूसीटी भोपाल, वन विहार भोपाल और कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वन अधिकारी एवं रेस्क्यू दल शामिल थे। कान्हा प्रबंधन ने बताया कि वन्यजीवों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी, वैज्ञानिक परीक्षण और त्वरित उपचार संरक्षण प्रबंधन का एक अहम हिस्सा है। यह बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के दीर्घकालिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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कान्हा में दो घायल बाघों का सफल इलाज:CDV जांच निगेटिव, स्वस्थ होने पर जंगल में छोड़ा गया














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