ग्वालियर में जलसंकट, पानी के लिए हाहाकार:टैंकर आते ही सिर-फुटौव्वल, कागजों पर जरूरत से ज्यादा सप्लाई, फिर भी प्यासा है पूरा शहर




ग्वालियर में भीषण गर्मी के बीच अब जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। शहर के कई इलाकों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पानी के टैंकर पहुंचते ही लोगों के बीच मारपीट और लाठी-डंडे चलने की नौबत आ रही है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, जबकि नगर निगम के पास संकट से निपटने का कोई ठोस प्लान नजर नहीं आ रहा। सुबह होते ही पार्षदों और जनप्रतिनिधियों के फोन पानी की शिकायतों से घनघनाने लगते हैं, तो कई जगह जनता अफसरों के घरों तक पहुंचकर घेराव कर रही है। जरूरत से ज्यादा पानी सप्लाई, फिर भी आधा शहर प्यासा दैनिक भास्कर की पड़ताल में नगर निगम के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ग्वालियर की आबादी वर्तमान में करीब 15 लाख से अधिक है। मानकों के अनुसार शहर को रोजाना लगभग 10 एमसीएफटी (MCFT) पानी की आवश्यकता है, जबकि निगम तिघरा डैम से प्रतिदिन करीब 12 एमसीएफटी पानी लिफ्ट कर रहा है। यानी जरूरत से करीब 2 एमसीएफटी अधिक पानी फिल्टर प्लांटों तक पहुंच रहा है। इसके बावजूद शहर का बड़ा हिस्सा पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है। टैंकर आते ही मच रहा हंगामा नगर निगम के अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि शहर में पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। कई मोहल्लों में हफ्तों से नलों में पानी नहीं आया। टैंकर पहुंचते ही लोग बाल्टी-बर्तन लेकर टूट पड़ते हैं और कई बार विवाद मारपीट तक पहुंच जाता है। इन इलाकों में सबसे ज्यादा संकट शहर के शिंदे की छावनी, घोसीपुरा, सिंधिया नगर, जागृति नगर, गोल पहाड़िया, लक्ष्मीगंज, हनुमान घाटी, क्रेशर कॉलोनी, टावर कॉलोनी, किलागेट, आरामील, रेशममिल, चंदनपुरा, गुड़ी-गुड़ा का नाका, आदित्यपुरम, शताब्दी पुरम, किला तलहटी, गिरवाई, मोतीझील और किशनबाग जैसे इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। कई घरों में हफ्तों से पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंची। जहां टैंकर भेजे भी जा रहे हैं, वहां आबादी के मुकाबले पानी नाकाफी साबित हो रहा है। लोगों का कहना है कि पानी के इंतजार में पूरा दिन खराब हो जाता है, जिससे उनकी दिहाड़ी और काम-धंधे प्रभावित हो रहे हैं। ग्वालियर को प्यासा रखने के तीन बड़े कारण 1. पानी सप्लाई का कोई तय समय नहीं शहर में पानी सप्लाई का कोई फिक्स टाइम टेबल नहीं है। लोग दिन-रात नलों के पास इंतजार करते रहते हैं। 2. लो प्रेशर और पंप ऑपरेटरों की मजबूरी ऊंचाई और पहाड़ी इलाकों में पानी चढ़ ही नहीं पा रहा। पंप ऑपरेटरों का कहना है कि मेन प्लांट से ही कम प्रेशर मिल रहा है। 3. अवैध कनेक्शन और टुल्लू पंप का खेल दबंग और रसूखदार लोग मुख्य पाइप लाइनों में अवैध कनेक्शन कर भारी मोटर लगाकर पानी खींच रहे हैं, जिससे अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। सड़क से परिषद तक जलसंकट पर बवाल जल संकट अब राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। नगर निगम परिषद की पिछली बैठक में विपक्ष की महिला पार्षद आशा चौहान ने समर्थकों के साथ परिषद गेट पर मटके फोड़कर प्रदर्शन किया। कांग्रेस पार्षद विनोद यादव पानी की समस्या से नाराज होकर अर्धनग्न अवस्था में पानी की टंकी पर चढ़ने निकल पड़े थे। कांग्रेस महासचिव सुनील शर्मा जनसुनवाई के दौरान निगम अधिकारियों का घेराव कर चुके हैं। वहीं भाजपा के कई पार्षद भी अपनी ही परिषद में धरने पर बैठ चुके हैं। जनता बोली- पानी के लिए जिंदगी ठप सिंधिया नगर निवासी शारदा देवी का कहना है कि उनका मकान ऊंचाई पर होने के कारण पानी नहीं पहुंच पाता। पानी के इंतजार में वे समय पर काम पर नहीं जा पातीं। वार्ड-2 निवासी नाथिया जोशी ने बताया कि दो-दो और तीन-तीन दिन तक नल नहीं आते। बार-बार मोटर चलाने से मोटरें जल रही हैं। टैंकर आने पर बाल्टियों में पानी ढोना मजबूरी बन गया है। भाजपा पार्षद ने दी आंदोलन की चेतावनी भाजपा पार्षद सुरेंद्र चौहान का कहना है कि उनके वार्ड का बड़ा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में है, जहां हर साल पानी का संकट रहता है। उन्होंने बताया कि निगम प्रशासन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब परिषद के बाहर मटके फोड़कर 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। समस्या हल नहीं हुई तो ग्वालियर की सड़कों पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।



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