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गोरखपुर के सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) रेल विहार, राप्ती नगर में रविवार को विद्वत परिषद की वार्षिक समीक्षा एवं कार्ययोजना बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, भारतीय संस्कारों को बढ़ावा देने और समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत की ओर से हुई, जिसमें गोरक्ष प्रांत के अलग-अलग विद्यालयों से आए आचार्य, शिक्षाविद और विद्वतजन शामिल हुए। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय सह संयोजिका डॉ. रिचा सिंह ने कहा कि विद्वत परिषद के विचारों और कार्यों को सिर्फ विद्यालयों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इन्हें समाज और प्रांत स्तर तक पहुंचाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि परिषद केवल योजना बनाने वाला मंच नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा के जरिए समाज को सही दिशा देने का काम किया जा रहा है। शिक्षा दर्शन और संस्कार आधारित शिक्षा पर दिया जोर बैठक की अध्यक्षता कर रहे शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के मंत्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि परिषद का मुख्य उद्देश्य शिक्षा दर्शन को मजबूत करना, शिक्षकों को सही मार्गदर्शन देना और संस्कार आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना भी जरूरी है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय निधि के संरक्षण और भारतीय शिक्षा पद्धति को मजबूत करने पर भी जोर दिया। भारतीय संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने की बात विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश निरीक्षक राम सिंह ने कहा कि विद्वत परिषद समाज और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर काम करता है। उन्होंने कहा कि हमारी पुरानी शिक्षा पद्धति, भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है। नई पीढ़ी को इन मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। परिषद इसी दिशा में लगातार काम कर रहा है।
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गोरखपुर में शिक्षा और संस्कार पर हुई चर्चा:विद्वत परिषद की बैठक संपन्न, राष्ट्र निर्माण पर दिया जोर














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