दैनिक भास्कर हेल्थकेयर लीजेंड्स अवॉर्ड:देश के प्रसिद्ध हार्ट सर्जन व पद्म भूषण डॉ. रमाकांत पांडा बोले- अभी डॉक्टर को पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर पाएंगे रोबोट




दैनिक भास्कर ‘हेल्थकेयर लीजेंड्स 2026’ सम्मान समारोह में हेल्थकेयर क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाले 42 डॉक्टरों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण देश के प्रसिद्ध हार्ट सर्जन और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. रमाकांत पांडा रहे। उन्होंने मेडिकल साइंस, हार्ट हेल्थ, लाइफस्टाइल और एआई के भविष्य पर अपने अनुभव साझा किए। दैनिक भास्कर के सीओओ सुमित मोदी ने कहा कि एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के चेयरमैन डॉ. पांडा ने 40 साल के करियर में 31 हजार से ज्यादा जटिल हार्ट सर्जरी की हैं और उनकी सफलता दर 99.8% रही है। इस दौरान सागर ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन सुधीर कुमार अग्रवाल ने कहा कि भोपाल में मेडिकल सुविधाएं लगातार बेहतर हो रही हैं और यहां मुंबई-दिल्ली की तुलना में कम खर्च में अच्छी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। कार्यक्रम के अंत में एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के एलएन मालवीय ने आभार व्यक्त किया। लगातार बैठे रहना अब नई स्मोकिंग, चीनी सबसे खतरनाक डॉ. पांडा ने कहा कि पिछले दो दशक में 29-30 साल के हार्ट मरीज तेजी से बढ़े हैं। इनमें 80% युवा आईटी और फाइनेंस जैसे कॉर्पोरेट सेक्टर्स से हैं। लगातार 8-10 घंटे स्क्रीन के सामने बैठना अब न्यू स्मोकिंग की तरह हो गया है। रातभर जागना, सिगरेट और जंक फूड युवाओं के दिल को समय से पहले बूढ़ा बना रहे हैं। हार्ट अटैक से बचना है तो खुश रहो, तनाव न लो। असली दुश्मन घी नहीं, चीनी और प्रोसेस्ड फूड डॉ. पांडा ने कहा कि असली खतरा प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा चीनी से है। हमारे बुजुर्ग रोज सुबह खेतों में 20 किमी तक पैदल चलते थे, इसलिए वे एक कटोरी घी भी आसानी से पचा जाते थे। आज हम चलना ही छोड़ चुके हैं। सीमित मात्रा में घी नुकसानदेह नहीं है, पर आज का युवा कोल्ड ड्रिंक्स, चाय और मिठाइयों के जरिए एक दिन में उतनी चीनी खा लेता है, जितनी पुराने समय में लोग महीनेभर में खाते थे। एआई इलाज बदलेगा, पर डॉक्टर की जगह लेना आसान नहीं एलन मस्क के इस बयान पर कि भविष्य में एआई डॉक्टरों को रिप्लेस कर देगा, डॉ. पांडा ने कहा कि एआई इलाज का तरीका बदलने आया है। अभी मरीज तब अस्पताल पहुंचता है, जब बीमारी बढ़ जाती है। आने वाले समय में शरीर खुद पहले बता देगा कि हार्ट अटैक दो दिन बाद आने वाला है। भविष्य में सेंसर, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और तेज इंटरनेट मिलकर ऐसा सिस्टम बनाएंगे, जिसमें मरीज घर पर रहेगा और मशीनें उसकी हर सेकंड की हेल्थ रिपोर्ट पढ़ती रहेंगी। पैरालिसिस मरीजों के दिमाग में चिप लगाकर उनके विचारों को आवाज में बदला जा रहा है। कार्डियोलॉजी में भी बड़े बदलाव आएंगे। हालांकि रोबोट अभी डॉक्टर का दिमाग नहीं बन सकता। रोबोटिक सर्जरी अभी सिर्फ डॉक्टर के हाथ का एक्सटेंशन है। डॉक्टर मुंबई में बैठकर भोपाल में ऑपरेशन कर सकता है, लेकिन फैसला अब भी इंसान ही लेता है। कोरोना नहीं, आपकी खराब लाइफस्टाइल दे रही है हार्ट अटैक सोशल मीडिया पर जिम या डांस करते हुए अचानक होने वाली मौतों को कोरोना वैक्सीन से जोड़ने के सवाल पर डॉ. पांडा ने कहा- ‘आईसीएमआर की रिसर्च में कोरोना और सडन डेथ का सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। कोरोना के दौरान शरीर में कुछ महीनों तक सूजन रहती है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन दो साल बाद होने वाले हार्ट अटैक की बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल है। रात की नौकरी के सवाल पर डॉ. पांडा ने कहा- ‘अगर काम की वजह से एक आदत बिगड़ रही है, तो बाकी अच्छी आदतों को और मजबूत करना जरूरी है।’ हेल्दी रहने के गोल्डन रूल डॉक्टर्स के सवाल Q. क्या तनाव और डिप्रेशन का असर दिल पर भी पड़ता है? – हां, लंबे समय तक रहने वाला तनाव हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और कैंसर तक का रिस्क बढ़ाता है। डिप्रेशन भी स्मोकिंग, मोटापा और डायबिटीज की तरह हार्ट डिजीज का बड़ा रिस्क फैक्टर माना जा रहा है। पहले संयुक्त परिवार का मजबूत सपोर्ट सिस्टम था। अब जिंदगी ज्यादा प्रतिस्पर्धी और जटिल हो गई है। लोगों में अकेलापन और तनाव बढ़ा है। एक्सरसाइज और परिवार का सहयोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी बताया गया। रोजाना एक्सरसाइज करने से शरीर में “फील गुड हार्मोन” निकलते हैं, जिससे तनाव कम होता है और व्यक्ति बेहतर महसूस करता है। Q. ईसीपी थैरेपी क्या है? – यह हार्ट मरीजों के लिए एक विशेष थेरेपी है। यह हर मरीज के लिए नहीं होती। कुछ चुनिंदा मरीजों में यह हार्ट के अंदर अल्टरनेट ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करती है, जिससे सीने का दर्द कम हो सकता है। लेकिन यह एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी का विकल्प नहीं है। Q. अच्छी नींद कितनी जरूरी है? – डॉक्टरों के मुताबिक 6 घंटे से कम नींद लेना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि सिर्फ घंटे नहीं, नींद की क्वालिटी भी महत्वपूर्ण है। गहरी और अच्छी नींद ज्यादा जरूरी मानी गई। योग, संतुलित एक्सरसाइज और अच्छी आदतें हेल्दी लाइफ बढ़ाने में मदद करती हैं। उद्देश्य सिर्फ लंबी उम्र नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन होना चाहिए। Q. क्या ज्यादा एक्सरसाइज भी नुकसान कर सकती है? – हां, डॉक्टरों ने संतुलन पर जोर दिया। जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज ऑर्थोपेडिक समस्याएं बढ़ा सकती है। इसलिए योग, वॉक और मॉडरेट एक्सरसाइज को बेहतर बताया गया।डॉक्टरों ने सलाह दी कि 40 साल के बाद हर व्यक्ति को कम से कम एक बेसलाइन हार्ट चेकअप जरूर कराना चाहिए। आजकल 20-30 साल की उम्र में भी हार्ट डिजीज के केस सामने आ रहे हैं। Q. कैल्शियम स्कोर क्या बताता है? – हाई कैल्शियम स्कोर का मतलब है कि शरीर की धमनियों में डैमेज और ब्लॉकेज बनने की संभावना बढ़ रही है। यह हार्ट डिजीज के खतरे का संकेत हो सकता है। हालांकि बेसलाइन चेकअप में सभी रिपोर्ट्स नार्मल है तो घबराने की जरूरत नहीं है। अपने शौक के बारे में पूछे जाने पर डॉ. पांडा ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मेरी जिंदगी दो दुनियाओं के बीच चलती है। एक तरफ हार्ट सर्जरी है, जहां मैं लोगों की जिंदगी बचाता हूं। दूसरी तरफ वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी, जो मुझे मानसिक शांति देती है।’ डॉ. पांडा ने मध्यप्रदेश को अपना पसंदीदा राज्य बताते हुए कहा कि यह सिर्फ टाइगर स्टेट नहीं, बल्कि वाइल्ड लाइफ प्रेमियों के लिए स्वर्ग है। वे लगभग हर दूसरे महीने यहां आते हैं। बांधवगढ़, कान्हा और सतपुड़ा के जंगल बेहद पसंद हैं। जब उनसे पूछा गया कि हार्ट सर्जरी और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में ज्यादा मुश्किल क्या है, तो उन्होंने कहा, ‘जिस काम को दिल से करो, वह आसान लगने लगता है। हार्ट सर्जरी मेरा पहला प्यार है और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी मेरा रिलैक्सेशन।’ एक प्रतिशत उम्मीद हो, तो मरीज को कभी नहीं छोड़ना चाहिए डॉ. पांडा ने अपने करियर का एक भावुक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में एक ऐसा मरीज आया था, जिसे लगभग सभी डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा कि अगर एक प्रतिशत भी उम्मीद है, तो कोशिश जरूर करनी चाहिए।’ सर्जरी के बाद मरीज कई दिन आईसीयू में रहा। हालत इतनी गंभीर थी कि तीन दिन में उसके शरीर से करीब 30 लीटर यूरिन निकला, लेकिन धीरे-धीरे वह ठीक हो गया। करीब डेढ़ साल बाद वही मरीज दिल्ली में उनकी ओपीडी में मिला। उसने बताया कि अब वह ट्रक ड्राइवर है और अपने परिवार का सहारा बना हुआ है। डॉ. पांडा ने कहा, ‘उस दिन मुझे एहसास हुआ कि हार्ट सर्जरी सिर्फ प्रोफेशन नहीं, जिंदगी बदलने की ताकत है। तभी मैंने तय किया कि गंभीर मरीज को मना नहीं करूंगा।’



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