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बुरहानपुर के स्वामीनारायण मंदिर सीलमपुरा में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर अधिक मास महात्म्य कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान शास्त्री चिंतन प्रियदास ने संत महिमा, गौसेवा और हरिनाम के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। शास्त्री चिंतन प्रियदास ने अधिक मास की महिमा बताते हुए कहा कि इस माह में गौमाता की सात बार परिक्रमा करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने यह भी बताया कि श्रद्धापूर्वक गौसेवा करने से बड़े कष्टों और रोगों से मुक्ति मिलती है। संत भगवान का ही स्वरूप होते हैं
संतों की महिमा का वर्णन करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि संत भगवान का ही स्वरूप होते हैं। जिस घर या गांव में संतों का आगमन होता है, वहां दशहरा और दीपावली जैसा पावन वातावरण बन जाता है। उन्होंने मनुष्य जीवन का ध्येय संतों का आश्रय लेना बताया। उन्होंने चिंता और चिंतन के बीच का अंतर भी समझाया। शास्त्री जी के अनुसार, चिंता छोड़कर भगवान का चिंतन करने से दुख स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने भक्ति को एनेस्थेशिया के समान बताया, जैसे एनेस्थेशिया से दर्द का अनुभव नहीं होता, वैसे ही हरिनाम से जीवन के दुख कम हो जाते हैं। कथा के अंत में पुरुषोत्तम मास में भजन, सत्संग, गौसेवा और दान-पुण्य करने का आह्वान किया गया। आरती के साथ कथा का समापन हुआ।
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पुरुषोत्तम मास में गौसेवा को अश्वमेध यज्ञ समान बताया:स्वामीनारायण मंदिर कथा में संत महिमा और हरिनाम से दुख दूर होने का संदेश दिया














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