चंबल सेंक्चुरी में अवैध रेत खनन के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा। बीते 20 मई को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना आदेश रिजर्व कर लिया था। आज 26 मई को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। इस फैसले पर मध्य प्रदेश समेत पूरे क्षेत्र की नजर
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। 20 मई को राजस्थान के पांच और मध्य प्रदेश के परिवहन सचिव मनीष सिंह व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए थे।
कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुन लीं और फैसला सुरक्षित रख लिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने चंबल में हो रहे अवैध रेत खनन मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए चिंता व्यक्त की थी।

चंबल सेंक्चुरी में मौजूद घड़ियाल।
परिवहन सचिव की ओर से दिया था जवाब
मप्र सरकार की ओर से परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने कोर्ट में विस्तृत जवाब (कॉम्पलाइंस एफिडेविट) पेश किया। इसमें बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और अवैध रेत परिवहन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा दिया गया। कोर्ट पहले मप्र की निगरानी व्यवस्था को प्रारंभिक चरण में बता चुका है।

20 मई को फैसला रख लिया था रिजर्व
20 मई को सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों (मप्र से परिवहन सचिव मनीष सिंह सहित) की व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज की गई। अमिकस क्यूरी, ASG, राज्य सरकारों के वकीलों की दलीलें सुनी गईं। कोर्ट ने कहा कि आगे इन अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं होगी, जब तक विशेष रूप से न बुलाया जाए। पूरा आदेश 26 मई को सुनाया जाएगा।

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‘सिर्फ ट्रक ड्राइवर नहीं, खनन के सरगनाओं को पकड़ो’

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में जारी अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मध्यप्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि कार्रवाई केवल ट्रक ड्राइवरों और हेल्परों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अवैध खनन के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क और असली सरगनाओं तक पहुंचना जरूरी है।पूरी खबर पढ़ें














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