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मुझे भिंडी नहीं पसंद वो भिंडी बनाती है इस लिए तलाक चाहिए। मेरे पति बहुत मोटे है इस लिए तलाक चाहिए। कभी पसंद की सब्जी, कभी पार्टनर के रंग और शरीर की बनावट जैसी वजहों से 7 जन्मों का बंधन 7 महीनों में टूट रहा है। राज्य में हर दिन 90 कपल तलाक के लिए अर्जी दे रहे हैं। इस बढ़ते आकडे़ की मुख्य वजह है आपसी सामंजस्य की कमी। नौकरी, भविष्य, भोजन, इच्छाएं और उम्मीदें… न जाने कितने मुद्दे हैं, जिन पर शादी से पहले कपल्स को आपस में बात करनी चाहिए, लेकिन वो करते नहीं है। कपल इन मुद्दों पर खूल बात करे इस लिए आज शादी से पहले काउंसलिंग का भी चल बढ़ रहा है। जहां शादी के बंधन में बंधने जा रहे जोड़ों को ये समझाया जाता है आपसी तालमेल कैसे बनाए रखें अब तक 300 से ज्यादा कपल करा चुके काउंसलिंग राजधानी में जनवरी से शुरू हुए इस सेंटर में अब तक 300 से ज्यादा कपल पहुंच चुके हैं। इनमें लव मैरिज और अरेंज मैरिज दोनों तरह के रिश्ते शामिल हैं। करीब 60% केस लव मैरिज वाले कपल्स के हैं, जबकि 20% अरेंज मैरिज से जुड़े हैं। काउंसलर्स समर खान ने बताया कि अब तक करीब 60% लोगों को यहां की काउंसलिंग से फायदा मिला है। यहां जेन-जी और कॉलेज स्टूडेंट ज्यादा आ रहे हैं। यह सेंटर महिला आयोग की ओर से चलाया जा रहा है। इसे निर्भया फाउंडेशन भोपाल के शक्ति सदन में चला रही है। लड़कियों और लड़कों की सबसे बड़ी चिंताएं काउंसलर्स के मुताबिक, शादी से पहले सबसे ज्यादा सवाल नौकरी, जॉइंट फैमिली, पर्सनल स्पेस और आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर आते हैं। केस-1: 7 साल रिलेशन में रहे, लेकिन सबसे जरूरी बात कभी नहीं हुई भोपाल का एक कपल, जो 7 सालों से रिलेशनशिप में था। परिवार भी शादी के लिए तैयार था। दोनों काउंसलिंग के लिए आए तो पता चला कि दोनों में कम्युनिकेशन गैप इतना है कि शादी के बाद लड़की नौकरी करेगी या नहीं, इस विषय पर जिक्र ही नहीं हुआ। लड़की अपने परिवार की अकेली कमाने वाली सदस्य थी। पिता की मौत के बाद मां, छोटे भाई और बहन की जिम्मेदारी उसी पर थी। लड़का सोच रहा था कि शादी के बाद लड़की उसका घर संभालेगी, जबकि लड़की मानकर चल रही थी कि उसकी जिम्मेदारियां नहीं बदलेंगी। काउंसलिंग में पहली बार दोनों ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। केस-2: इंटरकास्ट कपल बोला- पहले चुपचाप शादी कर लेते हैं काउंसलर ने बताया कि यह रीवा के दो इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स का मामला था। दोनों अलग-अलग जातियों से थे और भोपाल में पढ़ाई कर रहे थे। उन्हें डर था कि परिवार शादी के लिए तैयार नहीं होगा। दोनों सेंटर पहुंचे और कहा कि वे पहले चुपचाप शादी करना चाहते हैं। उनका मानना था कि नौकरी लगने और आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद परिवार को मना लेंगे। काउंसलर्स ने उन्हें जल्दबाजी से बचने की सलाह दी। उनसे कहा गया कि पहले पढ़ाई और करियर पूरा करना ज्यादा जरूरी है। केस-3: ‘जोरू का गुलाम’ कहलाने के डर भोपाल से एक कपल काउंसलिंग के लिए आया। 6 महीने बाद दोनों की अरेंज मैरिज होनी थी। शुरुआत में सब सामान्य लगा, लेकिन बातचीत आगे बढ़ी तो सोच का फर्क सामने आने लगा। लड़की ने बताया कि उसके घर में पिता भी मां के काम में मदद करते हैं। इस पर लड़के ने तुरंत कहा—
“हमारे यहां ऐसा नहीं होता। लोग मुझे जोरू का गुलाम कहेंगे।” फिर फाइनेंस और जिम्मेदारियों पर बात हुई। लड़का चाहता था कि शादी के बाद लड़की की बैंकिंग और खर्चों की जिम्मेदारी भी वही संभाले। लड़की ने साफ कहा कि वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहना चाहती है। काउंसलर्स के मुताबिक, ऐसे मामलों में कपल्स को शादी तो आसान लगती है, लेकिन शादी के बाद के एडजस्टमेंट के लिए वे मानसिक रूप से तैयार नहीं होते। ऐसे काम करता है सेंटर काउंसलर ने बताया कि सेंटर में कपल्स को सबसे पहले यह समझाया जाता है कि शादी सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों और एडजस्टमेंट का रिश्ता है। काउंसलिंग में ‘ड्रीम वर्सेस रियलिटी’ एक्टिविटी कराई जाती है। कपल्स से पूछा जाता है कि क्या सिर्फ प्यार शादी को सफल बना सकता है? क्या शादी के बाद सब अपने आप ठीक हो जाएगा? क्या पार्टनर बिना बोले हर बात समझ जाएगा? इसके अलावा फाइनेंस, करियर, बच्चों की जिम्मेदारी, वर्क-लाइफ बैलेंस और जॉइंट फैमिली जैसे मुद्दों पर अलग-अलग सेशन होते हैं। जरूरत पड़ने पर परिवार के लोगों को भी बातचीत में शामिल किया जाता है। एक प्रश्नावली होती है जिसमें पार्टन ये चेक करते है कि कहीं उनका पार्टनर रेड फ्लैग तो नही है। शादी रोकना नहीं, रिश्तों को तैयार करना मकसद काउंसलर्स ने कहा कि आज की पीढ़ी शादी के लिए तो तैयार दिखती है, लेकिन शादी के बाद आने वाली जिम्मेदारियों और बदलावों के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होती। हमने ने ऑब्जर्व किया कि लड़कियां शादी से पहले एडजस्टमेंट के लिए ज्यादा तैयार रहती हैं, लेकिन शादी के बाद वही चीजें उनके लिए घुटन बन जाती हैं। यही वजह है कि सेंटर में छोटी-छोटी बातें भी बड़े मुद्दों की तरह सामने आ रही हैं। काउंसलिंग का मकसद शादी रोकना नहीं, बल्कि कपल्स को भविष्य के लिए मानसिक रूप से तैयार करना है। प्री-मैरिटल काउंसलिंग क्यों जरूरी काउंसलर समर खान कहती है कि शादी से पहले अगर संवाद हो जाएं तो कई विवाद होन से पहले ही खत्म करने में मदद मिलेगी। शादी के लॉग टाइम कमिटमेंट है जिसमें विवाद असहमतियां होती है। इस काउसलिंग से उन असहमतियों पर कैसे बात की जानी चाहिए ये समझ कपल में पैदा करने की कोशिश करते है। प्रदेश में तलाक के आकड़े प्रदेश में हर दिन तलाक के 90 आवेदन फाइल किए जा रहे हैं। 2023 में फैमिली कोर्ट से जुड़े 27 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 32,874 तक पहुंच गए। सिर्फ भोपाल में 2024 के दौरान 3549 और इंदौर में 4174 तलाक आवेदन पहुंचे। वहीं, राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार 2025 के शुरुआती दो महीनों में ही 7106 पारिवारिक विवाद दर्ज हो चुके हैं। अब जानिए तलाक की तीन अजीबोगरीब वजहें केस-1: भिंडी की सब्जी से शुरू हुआ विवाद भोपाल के एक दंपती के रिश्ते में विवाद खाने की पसंद-नापसंद से शुरू हुआ। पति को भिंडी और गीली सब्जियां पसंद नहीं थीं, लेकिन पत्नी वही खाना बनाती रही। छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता तनाव मानसिक प्रताड़ना तक पहुंच गया। कई काउंसलिंग सेशन के बाद भी मामला नहीं सुलझा और रिश्ता कोर्ट तक पहुंच गया। केस-2: पत्नी बोली- पति मेरे ‘स्टैंडर्ड’ का नहीं शादी के कुछ साल बाद पत्नी ने पति के रंग-रूप और पर्सनैलिटी को लेकर असहजता जताई। उसका कहना था कि वह पति के साथ सार्वजनिक जगहों पर सहज महसूस नहीं करती। पति ने इसे शादी से पहले स्वीकार किया गया रिश्ता बताया, लेकिन लगातार मतभेदों और कई काउंसलिंग सेशन के बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला कर लिया। केस-3: “पति पतला नहीं होगा तो साथ नहीं रहूंगी” भोपाल के एक अरेंज मैरिज केस में पत्नी ने पति के मोटापे को रिश्ते टूटने की वजह बताया। उसने साफ कहा कि उसे पति का वजन पसंद नहीं है और वह उसके साथ सहज महसूस नहीं करती। काउंसलिंग में डाइट और लाइफस्टाइल सुधार की सलाह दी गई, लेकिन पत्नी अपने फैसले पर अड़ी रही और मामला अलगाव तक पहुंच गया।
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शादी से पहले संवाद, तलाक कम करने का रास्ता:4 महीनों में 300 से ज्यादा प्री-मैरिटल काउंसलिंग, Gen Z और स्टूडेंट्स दिखा रहे ज्यादा रुचि
















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