बरेली हिंसा : मौलाना तौकीर रजा की जमानत पर सुनवाई:हाईकोर्ट में 55 अन्य याचिकाएं सूचीबद्ध, दो घंटे चली थी केस पर बहस




इलाहाबाद हाईकोर्ट में बरेली हिंसा मामले के आरोपी मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। इस मामले से जुड़ी करीब 55 अन्य याचिकाओं को सूचीबद्ध किया गया है। आज यानी मंगलवार को न्यायमूर्ति अशुतोष श्रीवास्तव तौकीर रजा की जमानत याचिका सुनवाई करेंगे। 13 मई को मामले की सुनवाई टल गई थी। इसके बाद 25 मई को हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर दो घंटे तक बस चली। कोर्ट ने सुनवाई जारी रखते हुए मंगलवार लंच के बाद भी सुनवाई करने का आदेश दिया। 10 मार्च को सरकार ने रखा था पक्ष इससे पहले 10 मार्च को सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की तरफ से अपना पक्षा रखा गया था। सरकार का पक्ष आने के बाद मौलाना तौकीर रजा के वकीलों ने उसे देखने की बात कही थी। अब तौकीर रजा के वकीलों की ओर से अपना पक्ष कोर्ट में दाखिल किया जा चुका है। बरेली दंगे से जुड़ी सभी याचिकाओं को रिकॉर्ड पर जोड़ा गया पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बरेली दंगे से जुड़ी अन्य जमानत याचिकाओं को तौकीर रज़ा खान की जमानत याचिका के साथ रिकॉर्ड में जोड़ने का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुई हिंसा के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रज़ा खान ने जेल से बाहर आने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मौलाना तौकीर रज़ा खान ने कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत देने की गुहार लगाते हुए याचिका दाखिल की है। इससे पहले 18 फरवरी को बरेली हिंसा का मामला हाईकोर्ट में सुना गया था। तब कोर्ट ने जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए 24 फरवरी की तारीख लगाई थी। तौकीर रजा पर गंभीर आरोप मामले के तथ्यों के अनुसार 26 सितंबर 2025 को मौलाना तौकीर रजा ने बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज में एक विशेष समुदाय के सदस्यों को इकट्ठा होने का आह्वान किया था। इस पर बीएनएसएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद लगभग 500 लोगों की भीड़ इकट्ठी हुई और मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की ओर बढ़ी। बोर्ड आदि लिए और भड़काऊ नारे लगाते हुए भीड़ ने पुलिस की चेतावनी और समझाने की कोशिशों को नजरअंदाज किया। और आगे बढ़ने पर अड़े रहे, तो स्थिति और बिगड़ गई। इसके बाद भीड़ में शामिल लोगों ने पुलिस बल पर ईंटें, पत्थर व एसिड की बोतलें फेंकी और पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी भी की। एफआईआर के अनुसार हिंसा में पुलिसकर्मियों के कपड़े फट गए और दो अधिकारी घायल हो गए। आरोप है कि भीड़ की आक्रामक कार्रवाई ने क्षेत्र में आतंक का माहौल बना दिया। को तर्कसंगत बातचीत के माध्यम से भीड़ को समझाने में विफल रहने के बाद पुलिस अधिकारियों को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी।



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