रांची
मोरहाबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में मंगलवार को राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान, उद्यमी और आम लोग पहुंचे।
मेले में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, सिंचाई, उन्नत बीज, पौधों और कृषि उपकरणों से जुड़े कई स्टॉल लगाए गए हैं, जहां लोग नई तकनीकों और व्यवसायिक संभावनाओं की जानकारी ले रहे हैं।
मेले का प्रमुख आकर्षण महेशपुर मत्स्यपालन सहयोग समिति का स्टॉल रहा। समिति से जुड़ी 60 महिलाओं का समूह सामूहिक रूप से मछली पालन का कार्य कर रहा है। समूह की सदस्य सुनीता देवी ने बताया कि महिलाएं केवल मछली पालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उससे मूल्यवर्धित उत्पाद भी तैयार कर रही हैं।
मछली से समोसा, बर्गर, कटलेट और अचार बनाकर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मछली के अचार की खासियत यह है कि उसमें मछली की गंध बिल्कुल महसूस नहीं होती और उसका स्वाद सामान्य अचार की तरह ही होता है। इस पहल से महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अवसर मिला है।
वर्तमान में 60 महिलाएं इस कार्य से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। मेले में मोती पालन की आधुनिक तकनीक भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने बताया कि सीप (शीप) के माध्यम से मोती उत्पादन की प्रक्रिया में लगभग दो वर्षों का समय लगता है। इसके पालन में स्वच्छ जल, पर्याप्त ऑक्सीजन और शैवाल (ऐलगी) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रदर्शनी में मोती उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को मॉडल और प्रदर्शन के माध्यम से समझाया गया, जिससे किसानों और युवाओं ने काफी रुचि दिखाई।
इसके अलावा मेले में उन्नत किस्म के मिर्च, बैंगन तथा अन्य सब्जियों के पौधों की भी बिक्री की जा रही है। किसान नई किस्मों के बीज और पौधों की जानकारी लेकर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उपाय जान रहे हैं।















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