'मैं अली हूं..' पहचान छिपाकर 12 साल तक शोषण:रसूखदार कॉलोनाइजर कोर्ट में बोला- पत्नी नहीं 'रखैल' है; जज ने लगाया 1 लाख का जुर्माना




माता-पिता के रिश्ते की वैधता पर सवाल हो सकते हैं, लेकिन बच्चों को सड़क पर लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता। इंदौर फैमिली कोर्ट ने उस रसूखदार कॉलोनाइजर के खिलाफ यह टिप्पणी की, जिसने एक दशक से ज्यादा समय तक झूठ की बुनियाद पर रिश्ता चलाया और जिम्मेदारी आने पर मुकर गया। न्यायाधीश एके गोयल ने आरोपी पिता को दो बच्चों के भरण-पोषण के लिए 1 लाख रुपए प्रतिमाह देने का आदेश दिया। कोर्ट ने 25 लाख रुपए का पिछला बकाया चुकाने का भी आदेश दिया। कॉलोनाइजर ने पहचान छिपाकर मुस्लिम महिला से शादी की थी। बरसों तक लिव-इन में रहने के बाद उसने पत्नी को छोड़ दिया। इसके बाद महिला ने बच्चों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और कोर्ट से इंसाफ मिला। फरेब की बुनियाद: ‘अतुल’ से ‘अली’ बनने का सफर इस कहानी की शुरुआत 2011 में उज्जैन की एक किराना दुकान से हुई थी। वहां 33 वर्षीय समरीन मंसूरी (परिवर्तित नाम) की मुलाकात अतुल पंवार से हुई। उज्जैन के सेठी नगर निवासी अतुल ने अपनी असल पहचान छिपाकर खुद को ‘अली’ और मुस्लिम बताया। मोबाइल नंबरों के आदान-प्रदान से शुरू हुआ सिलसिला जल्द प्रेम संबंध में बदल गया। अतुल ने समरीन को शादी का झांसा दिया। जब परिवार ने कहीं और रिश्ता ढूंढना शुरू किया तो उसने निकाह का भरोसा देकर समरीन को रोक लिया। इंदौर में ‘लिव-इन’ और तीन अबॉर्शन का दंश अतुल समरीन को लेकर इंदौर आ गया, जहां वे विजय नगर के एक फ्लैट में पति-पत्नी की तरह रहने लगे। करीब 12 साल के रिश्ते में समरीन ने दो बच्चों को जन्म दिया- एक 6 साल की बेटी और एक 3 साल का बेटा। इस दौरान उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी। एडवोकेट केपी माहेश्वरी के मुताबिक, अतुल ने समरीन का तीन बार अबॉर्शन कराया। मेडिकल दस्तावेजों पर उसने खुद को ‘पति’ बताते हुए हस्ताक्षर किए थे। बार-बार गर्भपात से समरीन का स्वास्थ्य बिगड़ गया। बाद में अतुल उसे और बच्चों को छोड़कर चला गया। कोर्ट में ‘ओछी’ दलील: पत्नी नहीं ‘रखैल’ है मामला कोर्ट पहुंचने पर अतुल पंवार के रसूख और असलियत की परतें खुलीं। वह ‘अतुल इंफ्रास्ट्रक्चर’ का मालिक है और ‘स्वस्तिक विहार’ जैसी बड़ी कॉलोनियां विकसित करता है। खुद को बचाने के लिए दिए गए उसके तर्कों को न्यायाधीश ने ‘अशोभनीय’ करार दिया। अतुल ने दलील दी कि वह हिंदू है और उसकी पहली पत्नी व बच्चे जीवित हैं, इसलिए हिंदू कानून के तहत समरीन को पत्नी का दर्जा नहीं मिल सकता। उसने समरीन को ‘रखैल’ तक कहा। इस दलील पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की। हाई कोर्ट में ‘कबूलनामा’, फैमिली कोर्ट में ‘धोखा’ इस मामले में अतुल का दोहरा चेहरा तब सामने आया, जब पता चला कि समरीन ने विजय नगर थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म (धारा 376) की एफआईआर दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए अतुल ने हाई कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई और स्वीकार किया था कि समरीन उसकी पत्नी है और दोनों बच्चे उसके हैं। इसी स्वीकारोक्ति के आधार पर उसे जमानत मिली थी। लेकिन फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की बात आते ही वह अपने बयान से पलट गया। करोड़ों का साम्राज्य और विदेश में पढ़ाई कोर्ट ने अतुल की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण किया तो उसकी विलासिता की पोल खुल गई। पीड़ित महिलाओं के लिए ‘मील का पत्थर’ एडवोकेट केपी माहेश्वरी के मुताबिक, यह फैसला उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक और सामाजिक दबाव के कारण रसूखदारों के खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ पातीं। करीब पांच साल पहले बेसहारा छोड़ी गई समरीन ने हार नहीं मानी और आखिरकार बच्चों का हक हासिल किया।



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