पटना
मानसून के सक्रिय होते ही बिहार में बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज हो गई हैं। जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में चल रहे कटावरोधी और बाढ़ सुरक्षा कार्यों की निगरानी बढ़ा दी है। इसी कड़ी में विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बुधवार को सारण और वैशाली जिले के कई संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की। साथ ही अधिकारियों और एजेंसियों को तय समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। विभाग का फोकस इस बार बाढ़ से पहले सभी संवेदनशील स्थलों को सुरक्षित करना है।
सबलपुर में 10 दिन की डेडलाइन
सारण जिले के सोनपुर प्रखंड स्थित सबलपुर पछियारी टोला में गंगा नदी के किनारे चल रहे कटावरोधी कार्यों का सचिव ने स्थल निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान बोल्डर एप्रोन और स्लोप पिचिंग के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया गया। सचिव ने अधिकारियों को बोल्डर एप्रोन का कार्य हर हाल में 10 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा स्लोप पिचिंग और अन्य सभी शेष कार्य इसी महीने के भीतर पूरा करने को कहा गया। यह इलाका पिछले वर्षों में कटाव की दृष्टि से काफी संवेदनशील रहा है। इसी कारण यहां कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है।
गनियारी में अंतिम चरण में पहुंचा काम
इसके बाद सचिव ने वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के गनियारी गांव का दौरा किया। यहां गंगा नदी के कटाव से गांव और राष्ट्रीय राजमार्ग 122-बी की सुरक्षा के लिए कार्य चल रहा है।
निरीक्षण में पाया गया कि बोल्डर एप्रोन और स्लोप पिचिंग का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अधिकारियों ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा।
सचिव ने कार्यों की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने का निर्देश दिया। साथ ही नियमित मॉनिटरिंग जारी रखने को कहा गया।
पिछले साल के हॉटस्पॉट पर विशेष नजर
विभाग ने वर्ष 2025 में बाढ़ और कटाव से सबसे अधिक प्रभावित रहे स्थलों को इस बार प्राथमिकता सूची में रखा है।
इनमें सारण का सबलपुर पछियारी टोला, वैशाली का गनियारी, भोजपुर का जवईनियां और भागलपुर का इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध शामिल हैं।
सारण जिले के मकेर प्रखंड स्थित हैजलपुर गांव के सुरक्षात्मक कार्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। जबकि शेष संवेदनशील स्थलों पर कार्य इस माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हाल के दिनों में सचिव ने भोजपुर और भागलपुर के स्थलों का भी निरीक्षण किया था। विभाग लगातार प्रगति की निगरानी कर रहा है।
381 स्थलों पर 1115 करोड़ की सुरक्षा कवच योजना
बाढ़ से बचाव के लिए इस वर्ष राज्यभर में बड़े पैमाने पर कटावरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, कोशी, महानंदा और गंगा नदी बेसिन के 381 स्थलों पर कार्य चल रहा है।
इन परियोजनाओं पर कुल 1115.08 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य बाढ़ अवधि शुरू होने से पहले सभी जरूरी सुरक्षा कार्यों को पूरा करना है।
बिहार का 73 प्रतिशत से अधिक भूभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आता है और 38 में से 29 जिले बाढ़ प्रवण हैं। ऐसे में समय पर तैयारियां ही बाढ़ से जन-धन की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी मानी जा रही है।
















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