चंडीगढ़
हरियाणा के शहरों और कस्बों में वर्षों से सुबह की शुरुआत एक परिचित दृश्य के साथ होती है। लेबर चौकों पर सैकड़ों निर्माण श्रमिक, राजमिस्त्री, पेंटर, प्लंबर, बढ़ई और महिला मजदूर काम मिलने की उम्मीद लेकर खड़े रहते हैं।
जैसे ही कोई ठेकेदार या मकान मालिक पहुंचता है, काम पाने की होड़ शुरू हो जाती है। कई बार एक ही व्यक्ति को बार-बार काम मिल जाता है, जबकि कई श्रमिक कई दिनों तक खाली हाथ निराश होकर लौटते हैं। अब इस पूरी व्यवस्था को बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।
हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा विमानन मंत्री विपुल गोयल ने ''श्रम टोकन आधारित लेबर चौक प्रबंधन प्रणाली'' का मॉडल तैयार किया है। टोकन बनाने का काम सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर, राज्य सरकार के स्तर पर अथवा निजी कंपनी को भी प्रदान किया जा सकता है।
फरीदाबाद में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे पूरे हरियाणा में लागू करने की तैयारी है। मंत्री जल्द ही इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और श्रम मंत्री अनिल विज से चर्चा करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक श्रमिक का पंजीकरण किया जाएगा और उसे एक टोकन कार्ड दिया जाएगा। काम देने वाला व्यक्ति जब लेबर चौक पहुंचेगा तो टोकन के क्रम के अनुसार ही श्रमिक को काम मिलेगा। इससे धक्का-मुक्की, मनमानी और बार-बार एक ही व्यक्ति को काम मिलने जैसी शिकायतों पर रोक लगेगी। साथ ही मजदूरी की दरें भी तय होने से श्रमिकों के शोषण की संभावना कम होगी और काम देने वालों को भी पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी।
हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, अंबाला, पंचकूला, हिसार, भिवानी, जींद, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, सिरसा, रेवाड़ी, पलवल, महेंद्रगढ़ और बहादुरगढ़ सहित लगभग सभी प्रमुख शहरों में लेबर चौक असंगठित श्रम बाजार की रीढ़ हैं। रोज हजारों श्रमिक इन्हीं चौकों के भरोसे रोजगार की तलाश में निकलते हैं, लेकिन अब तक उनके लिए कोई समान और सुव्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी।
विपुल गोयल का कहना है कि यह केवल टोकन प्रणाली नहीं, बल्कि श्रमिक सम्मान और सुशासन की नई पहल है। पंजीकृत श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच, उपचार और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना भी आसान होगा। तकनीक आधारित इस मॉडल से श्रम प्रबंधन अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनेगा।
यदि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होती है तो हरियाणा असंगठित श्रम क्षेत्र में बड़ा सुधार करने वाला अग्रणी राज्य बन सकता है। यह पहल केवल काम के आवंटन का नया तरीका नहीं, बल्कि उन हजारों मेहनतकश श्रमिकों को सम्मान, समान अवसर और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।














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