एच1एन1 को लेकर कानपुर अलर्ट, हैलट-उर्सला में 40 बेड रिजर्व; दवाओं का स्टॉक बढ़ाया

लखनऊ
उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों में एच1एन1 वायरस के मामले सामने आने के बाद कानपुर का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए शहर के हैलट और उर्सला अस्पतालों में शुरुआती तैयारियां कर ली गई हैं। दोनों अस्पतालों में 20-20 बेड आरक्षित किए गए हैं। इसके साथ ही जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने हैलट, उर्सला समेत अन्य अस्पतालों के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को संदिग्ध मरीजों की पहचान को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि एच1एन1 के लक्षण वाले मरीज मिलने पर इसकी सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों को दी जाए, जिससे समय रहते जांच और उपचार की व्यवस्था की जा सके। संदिग्ध मरीजों की निगरानी के साथ संक्रमण को दूसरे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों तक पहुंचने से रोकने के लिए भी जरूरी सावधानी बरतने को कहा गया है।

हैलट के प्रमुख अधीक्षक डॉ सौरभ अग्रवाल, उर्सला की निदेशक डॉ सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, संभावित खतरे से निपटने की भी पूरी तैयारी की गई है। बेड के साथ पर्याप्त दवा का स्टॉक रखने को कहा गया है। ओपीडी में संदिग्ध मरीजों की तत्काल सूचना देने को कहा गया है। फिलहाल अभी यहां ऐसे किसी खतरे की आशंका नहीं है।

खांसी-बुखार के साथ सांस फूलना गंभीर संकेत
डॉक्टरों के अनुसार, स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के साथ निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, सर्दी लगना और अत्यधिक कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसी गंभीर स्थिति भी हो सकती है।

बचाव के लिए सावधानी जरूरी
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचने, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकने, हाथों की नियमित सफाई करने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर सावधानी बरतने की अपील की है। बुखार और खांसी होने पर खुद से एंटीबायोटिक या अन्य दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना बेहतर है। अस्पतालों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इन लोगों को ज्यादा खतरा
छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से हृदय, फेफड़े, मधुमेह या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखने पर इलाज में देरी न करने की सलाह दी गई है।

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