नई दिल्ली
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुतिन से मुलाकात भी हुई है. दोनों देशों ने आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया. दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 5 और यूनिट खरीदने का फैसला किया है. इस तरह भारत के पास इस अल्ट्रा मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम के कुल 10 स्क्वाड्रन हो जाएंगे. ऑपरेशन सिंदूर में S-400 ने पाकिस्तान को नानी याद दिला थी. अब रूस ने भारत दो बड़े ऑफर दिए हैं. पहला, पांचवीं पीढ़ी का Su-57 फाइटर जेट और दूसरा बेहद ताकतवर 177S जेट इंजन. 177S फाइटर जेट इंजन दुनिया के ताकतवर इंजन में शुमार है. रूस की ओर से दिए गए ऑफर में Su-30MKI को 177S जेट इंजन के साथ अपग्रेड करने का ऑफर दिया गया है. यदि इसपर बात बनती है तो Su-30MKI रफ्तार के मामले में अमेरिका के 5th जेनरेशन जेट F-35 और राफेल लड़ाकू विमान से और भी ज्यादा ताकतवर हो जाएगा. बता दें कि Su-30MKI फाइटर जेट ने ही पाकिस्तान पर ब्रह्मोस बरसाया था।
रूस ने भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए अपने एडवांस Izdeliye 177S इंजन की पेशकश की है. इस इंजन को मौजूदा Su-30MKI में बड़े ढांचागत बदलाव के बिना इंटीग्रेशन करने की संभावना जताई जा रही है. इससे भारत को पुराने इंजन की जगह अधिक क्षमता वाले पावरप्लांट को अपनाने का विकल्प मिल सकता है. रूसी प्रस्ताव के अनुसार, 177S इंजन 14.5 टन तक का थ्रस्ट दे सकता है. इसका आकार और वजन AL-31F/FP इंजन के समान बताया गया है, जिससे Su-30 परिवार के विमानों में इसके इंटीग्रेशन को अपेक्षाकृत आसान बनाने में मदद मिल सकती है. इंजन की सेवा अवधि करीब 6,000 घंटे और अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में ईंधन खपत में लगभग 7 प्रतिशत कमी का दावा किया गया है।
भारत के लिए क्यों अहम
भारत के लिए इस प्रस्ताव का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पहले से ही रूस के साथ लाइसेंस के तहत AL-31FP इंजन का उत्पादन और रखरखाव (Production and Maintenance) करता है. ऐसे में 177S पर सहयोग भारतीय एयरोस्पेस उद्योग की घरेलू क्षमता को आगे बढ़ाने का अवसर दे सकता है. यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और रूस के बीच Su-57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर भी बातचीत जारी है. ऐसे में फाइटर जेट इंजन सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापक लड़ाकू विमान और एयरोस्पेस साझेदारी का अगला चरण बन सकता है।
F-35 और राफेल से भी ताकतवर हो जाएगा Su-30MKI
Su-30MKI एक ट्विन इंजन हेवी फाइटर जेट है. इसमें फिलहाल दो AL-31FP टर्बोफैन इंजन लगे हुए हैं. हर इंजन की ताकत 123 KN की है. इस तरह Su-30MKI लड़ाकू विमान 246 KN थ्रस्ट के साथ उड़ान भरने में सक्षम है. रूसी टर्बो फाइटर जेट मैक-2 यानी 2469 KMPH से भी ज्यादा की रफ्तार से टार्गेट की तरफ भाग सकता है. अब बात करते हैं राफेल फाइटर जेट की. इसमें 75 KN के थ्रस्ट वाले दो इंजन लगे हैं. ट्विन इंजन होने की वजह से फ्रांस का यह जेट 150 KMPH की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. वहीं, अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान F-35 भी इस मामले में Su-30MKI से पीछे है. F-35 फाइटर जेट 191 KN थ्रस्ट से उड़ान भर सकता है. फ्लाइट मोड में इसकी रफ्तार मैक-1.6 यानी 1975 KMPH होती है।















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