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भास्कर न्यूज | गढ़वा आरके पब्लिक स्कूल गढ़वा में रविवार को ग्रैंड पैरेंट्स डे के अवसर पर दादा-दादी अरबनाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दादा-दादी, नाना-नानी, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत गान एवं मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक अलखनाथ पांडेय, ड्रग एसोसिएशन गढ़वा के अध्यक्ष अद्याशंकर पांडेय, कृष्ण प्रसाद महतो सहित उपस्थित छात्र-छात्राओं के दादा-दादी एवं नाना-नानी ने साथ मिलकर संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक अलखनाथ पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों के जीवन में संस्कार, प्रेम और मार्गदर्शन के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं। वहीं नई पीढ़ी में संस्कार भरने का कार्य उनके माध्यम से ही संभव है। उन्होंने एकल परिवार की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए बच्चों एवं बुजुर्गों के बीच आत्मीय संवाद बनाए रखने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गीत, नृत्य, कविता एवं लघु नाटिकाओं के माध्यम से दादा-दादी एवं नाना-नानी के महत्व को प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने मोबाइल फोन के बढ़ते दुष्प्रभावों एवं बच्चों में बढ़ते एकाकीपन को भी प्रभावशाली नाटिका के जरिए दर्शाया। दिव्य प्रकाश, नम्रता, आराध्या सहित कई विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई क्राफ्ट प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। जिसकी सभी अतिथियों एवं अभिभावकों ने सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मनोरंजक गतिविधियां एवं सहभागिता प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। जिनमें दादा-दादी एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को मेडल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कई अभिभावकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बच्चों के भविष्य निर्माण में विद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। इस अवसर पर अनीता सिन्हा, अभिलाषा तिवारी, पूनम राय, नीतू सिंह, प्रियंका केसरी, अमीषा, स्वाति तिवारी, रंजीत गुप्ता, अमित पाठक सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्राची पांडेय ने किया। जबकि अंत में शैला खान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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बुजुर्ग हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं : अलखनाथ पांडेय












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