कोलकाता/नई दिल्ली
चुनाव आयोग ने टीएमसी में टूट के बाद ममता बनर्जी गुट को नए नाम की मंजूरी दे दी है। ममता बनर्जी गुट ने तीन नामों का विकल्प पेश किया था, इस आधार पर आयोग ने ' ऑल इंडिया तृणमूल ममता कांग्रेस ( AITMC ) का नाम दिया है। उनका चुनाव चिन्ह फुटबॉल खिलाड़ी होगा। जबकि बागी रितब्रत गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम के साथ लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। रितब्रत गुट ने आयोग को दो नाम सुझाए थे। गुरुवार को विवाद पर सुनवाई के बाद निर्वाचन आयोग ने टीएमसी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया था।
गुरुवार को फ्रीज हुआ था दो फूल वाला सिंबल
गुरुवार को चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों के दावों पर विचार किया था। करीब एक सप्ताह पहले भी आयोग ने ममता बनर्जी गुट और रितब्रत बनर्जी से दावों के समर्थन में दस्तावेज देने को कहा था। रितब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि टीएमसी के संविधान के मुताबिक, ममता बनर्जी का अध्यक्ष पद का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका था। अब नई कार्यकारिणी ने अरुप रॉय को अध्यक्ष चुना है। ममता बनर्जी ने गुट ने कहा कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ममता बनर्जी ही पार्टी की अध्यक्ष हैं। उनके पास ही नई कार्यकारिणी और पदों पर नियुक्ति का अधिकार है। इसके बाद चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले सिंबल विवाद पर निर्णय सुरक्षित रख गया। गुरुवार को आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और चुनाव चिन्ह पत्तियों के साथ दो फूल को फ्रीज कर दिया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निंदा
चुनाव आयोग के फैसले से ममता बनर्जी गुट के सांसद कल्याण बनर्जी ने असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वीकार नहीं है, मगर परिस्थितियों के आगे कुछ किया नहीं जा सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी टीएमसी के सिंबल और नाम फ्रीज किए जाने पर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी वोट लूट के बाद अब पार्टी लूट रही है। यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर वोटर की लड़ाई है, जो निष्पक्ष चुनाव चाहता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि आयोग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह बीजेपी की कठपुतली है।
11 बजे तक चुनाव आयोग ने मांगे थे नए नाम और चिन्ह
तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी घमासान और पार्टी के टूटने के बाद चुनाव आयोग ने यह अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने स्पष्ट किया था कि ममता बनर्जी का गुट यानी 'कालीघाट-तृणमूल' और विरोधी गुट यानी 'ऋतब्रत-तृणमूल', दोनों में से कोई भी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम या पुराना 'जोड़ाफुल' सिंबल इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
आयोग ने दोनों गुटों को आज सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन नए नाम और चुनाव चिन्हों की लिस्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।
ममता और ऋतब्रत ने क्या-क्या नाम दिए?
चुनाव आयोग की डेडलाइन से पहले दोनों धड़ों ने अपने-अपने नए नाम और प्रतीकों की लिस्ट आयोग को सौंप दी है।
ममता बनर्जी ('कालीघाट-तृणमूल') गुट के विकल्प:
3 संभावित नाम: 'ममता सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस', 'सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस ममता', और 'तृणमूल ममता कांग्रेस'।
चुनाव चिन्ह के विकल्प: सूत्रों के मुताबिक इस गुट ने फुटबॉल खिलाड़ी और क्रिकेट बैट जैसे प्रतीकों को अपनी पहली पसंद बताया है।
ऋतब्रत गुट ('ऋतब्रत-तृणमूल') के विकल्प:
3 चुनाव चिन्ह: इस गुट ने चुनाव आयोग के फ्री-सिंबल लिस्ट में से 'ब्लैक बोर्ड', 'लिफाफा' और 'टॉर्च' की मांग की है।
तृणमूल की टूट पर मचा सियासी घमासान
तृणमूल का नाम और सिंबल छिन जाने के बाद राज्य और देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, "तृणमूल पहले ही टूट चुकी थी, अब उसका नाम और सिंबल भी चला गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से पीएम मोदी को जन्मदिन का ये लेट-नाइट गिफ्ट है।"
वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में जारी फूट और कानूनी स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग का यह फैसला पूरी तरह से तर्कसंगत और निष्पक्ष है।
बहरहाल, 28 साल बाद अपने ही बनाए नाम और चुनाव चिन्ह से महरूम हुईं ममता बनर्जी के लिए यह उप-चुनाव एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनने जा रहा है।
















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