ज्यादातर लोग पकौड़े खाना पसंद करते हैं. पकौडे़ खाने में जितने स्वादिष्ट लगते हैं, उन्हें बनाने में उतना ही समय और मेहनत लगती है. ऐसे में क्या हो अगर थाली में कुछ ऐसा परोसा जाए, जिसमें घर के देसी खाने का स्वाद भी हो और बनाने में ज्यादा झंझट भी न हो? तो आप कहेंगे नेकी और पूछ पूछ, मजा ही आ जाएगा. छत्तीसगढ़ की मूली भाजी और दाल ऐसी ही ट्रेडिशनल डिश है.
हरी मूली की पत्तियों और दाल से बनने वाली ये सब्जी कम मसालों में तैयार हो जाती है, लेकिन ऊपर से पड़ने वाला लहसुन, मिर्च और जीरे का तड़का इसके स्वाद को खास बना देता है. इसे गरमा-गरम चावल या रोटी के साथ खाया जाए तो साधारण खाना भी बेहद स्वादिष्ट लगने लगता है. अगर आप भी बारिश के जाते मौसम का भरपूर मजा लेना चाहते हैं, तो ये रेसिपी आपके बहुत काम आ सकती है. चलिए जानते हैं कैसे बनाते हैं छत्तीसगढ़ की मूली भाजी और दाल की सब्जी.
मूली भाजी और दाल बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स
मूली की हरी भाजी- 1 गुच्छा
दाल- 1 कप
तेल- 1-2 बड़े चम्मच
जीरा- 1 छोटा चम्मच
लहसुन- 5-6 कलियां
हरी मिर्च- 2-3
नमक- स्वादानुसार
हल्दी- ½ छोटा चम्मच (ऑप्शनल)
पानी- जरूरत के अनुसार
बनाने का तरीका
1. इस सब्जी की सबसे खास बात ये है कि इसमें मूली के साथ उसकी हरी पत्तियों यानी मूली भाजी का भी इस्तेमाल होता है. सबसे पहले भाजी को अच्छी तरह चुनकर साफ कर लें.
2. पत्तियों पर लगी मिट्टी हटाने के लिए इन्हें बहते पानी में अच्छी तरह धोना जरूरी है. इसके बाद भाजी को बारीक या अपनी पसंद के हिसाब से काट लें और एक बार फिर पानी से धो लें.
3. अब साफ की हुई मूली भाजी को दाल के साथ प्रेशर कुकर में डाल दें. इसमें जरूरत के हिसाब से पानी और नमक मिलाएं और कुकर का ढक्कन बंद कर दें. इसे करीब 2 से 3 सीटी आने तक पकाया जा सकता है.
4. जब कुकर का प्रेशर निकल जाए तब उसके बाद ढक्कन खोलें और भाजी-दाल को अच्छी तरह मिला लें.
5. अब इस साधारण सी भाजी को स्वादिष्ट बनाने की बारी आती है. इसके लिए कढ़ाई में थोड़ा तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर इसमें जीरा, लहसुन और मिर्च डालकर अच्छे से भूनें. जब लहसुन हल्का सुनहरा होने लगे और उसकी खुशबू आने लगे, तो समझिए तड़का तैयार है.
6. अब इसमें कुकर में पकी हुई मूली भाजी और दाल डाल दें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर कुछ मिनट पकाएं, ताकि तड़के का स्वाद पूरी सब्जी में अच्छी तरह घुल जाए. चाहें तो स्वाद के मुताबिक नमक और मसाला भी एडजस्ट कर सकते हैं.
चावल हो या रोटी, दोनों के साथ लगेगी लाजवाब
मूली भाजी और दाल की यह सब्जी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक घरों में लंबे समय से बनाई जाती रही है. इसकी खासियत यही है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा मसालों या किसी खास इंग्रेडिएंट्स की जरूरत नहीं पड़ती. साधारण दाल, हरी भाजी और घर के मसालों से ही बढ़िया स्वाद तैयार हो जाता है.
बारिश के दिनों में गरमा-गरम चावल के साथ इसका स्वाद खास तौर पर अच्छा लगता है. वहीं रोटी के साथ भी इसे आसानी से परोसा जा सकता है. अगर रोज की दाल-सब्जी से कुछ अलग लेकिन पूरी तरह देसी खाना ट्राई करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ की ये मूली भाजी और दाल जरूर बना सकते हैं.
















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