जल जीवन मिशन से 'सुरक्षित छत्तीसगढ़'
धमतरी में बारिश के बाद पेयजल सुरक्षा का महाअभियान, 3,110 जल बहिनियां संभाल रहीं मोर्चा
रायपुर
मानसून के अंतिम दौर में भारी बारिश के बाद जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए धमतरी जिले में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और गुणवत्ता की निगरानी के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है। 'स्रोत से घर तक सुरक्षित पानी और हर बूंद में भरोसा' के संकल्प के साथ जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) जल जीवन मिशन के तहत पानी की शुद्धता, क्लोरीनेशन और टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित कर रहे हैं।
कलेक्टर के निर्देशानुसार संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बारिश के बाद जलभराव के कारण होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए व ई की रोकथाम करना है।
ग्रामीण जल सुरक्षा का मजबूत ढांचा
धमतरी जिले में सुरक्षित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशाल और सुदृढ़ अधोसंरचना निरंतर कार्यरत है। जिले में पेयजल के लिए कुल 16,024 स्रोत उपलब्ध हैं, जिनमें 9,981 हैंडपंप, 718 नल-जल योजनाएं और 2 वृहद समूह जल प्रदाय योजनाएं शामिल हैं, जो दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी पहुंचा रही हैं। पानी के सुरक्षित भंडारण के लिए जिले भर में 548 जल टंकियां बनाई गई हैं। इसके साथ ही, जलापूर्ति को पूरी तरह कीटाणुरहित और सुरक्षित बनाने के लिए 529 आधुनिक क्लोरिनेटर मशीनें स्थापित की गई हैं, जो नमक और पानी के घोल से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा सक्रिय क्लोरीन तैयार कर पानी को सूक्ष्मजीवों और हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त रखती हैं।
3,110 'जल बहिनियां' बनीं गांव-गांव की पहरेदार
पेयजल की गुणवत्ता जांच में जनभागीदारी का अनूठा मॉडल प्रस्तुत करते हुए जिले के 623 गांवों में फील्ड टेस्ट किट (FTK) वितरित की गई है। प्रत्येक गांव से 5-5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रकार 3,110 प्रशिक्षित 'जल बहिनियां' प्राथमिक स्तर पर पानी की नियमित जांच कर रही हैं। यदि जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो विभागीय अमला तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करता है।
हर सप्ताह 120 घरों और 15 टंकियों के पानी का लैब टेस्ट
जांच व्यवस्था को केवल जलस्रोत तक सीमित न रखते हुए उपभोक्ता के घर तक विस्तारित किया गया है। जिले के चारों विकासखंडों—कुरूद, मगरलोड, धमतरी और नगरी से हर सप्ताह 30-30 यानी कुल 120 घरेलू जल नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण कराया जा रहा है। इसके अलावा हर हफ्ते 15 जल टंकियों की भी विशेष निगरानी की जा रही है।
जिला प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने नागरिकों से पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है। पानी के रंग, गंध या स्वाद में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखने पर तुरंत ग्राम पंचायत या PHE विभाग को सूचित करने का आग्रह किया गया है, ताकि समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके।















Leave a Reply