नई दिल्ली
62वें म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दुनिया को कई अहम मुद्दों पर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस कमरे में मौजूद कोई भी इस बात से असहमत नहीं होगा कि आज की स्थिति मुख्य रूप से अमेरिका की बदली हुई स्थिति से तय हो रही है। यह बदलाव उसने खुद चुना है और एक तरह से, वह जान-बूझकर ज्यादा अकेला पड़ गया है। मौजूदा हालात की दूसरी अहम बात चीन का उभार है। चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है।
कई मायनों में यह उसकी अपनी सोच भी है और हकीकत भी और हम बहुत कड़ा मुकाबला देख रहे हैं। आज यह मुकाबला सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी देश के पास जो भी ताकत या बढ़त है, उसका इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है और यह मुकाबला आपसी निर्भरता की जटिलताओं के साथ-साथ चल रहा है।
जयशंकर ने समझाया 'मिडिल पावर' का मतलब
एस जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि यह बताना ज्यादा आसान है कि 'मिडल पावर' (मध्यम शक्ति) क्या नहीं है, बजाय इसके कि आज यह बताया जाए कि 'मिडल पावर' क्या है। हमें इस शब्द को बहुत शाब्दिक अर्थ में नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसे देश होंगे। चलिए G20 जैसी परिभाषा को ही लेते हैं। ऐसे देश हो सकते हैं जो G20 में शामिल न हों, लेकिन फिर भी यह अर्थव्यवस्था के आकार पर आधारित सीधी परिभाषा नहीं है। वे किसी खास क्षेत्र में बहुत अहम भूमिका निभाते हों।
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मेरे दिमाग में एक उदाहरण नीदरलैंड का आता है, जो सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में है या फिर UAE जैसे देश को देखें, जो अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा असरदार भूमिका निभाता है। मैं यही कहूंगा कि उभरती हुई शक्तियों और मध्यम शक्तियों, दोनों ही मामलों में, हमें इस बात को लेकर बहुत लचीला और व्यापक नजरिया अपनाना चाहिए कि हम असल में किस बारे में बात कर रहे हैं।
अमेरिका और चीन को लेकर भी दिया संदेश
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि जब हम संभावनाओं की बात करते हैं, तो हम अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भी नजर डालते हैं। जैसा कि मैंने कहा, यह तय करना जरूरी है कि 'मिडल पावर' (मध्यम शक्ति) क्या नहीं है। यहां सबसे पहले अमेरिका का नाम आता है, जो कई दशकों से वैश्विक व्यवस्था का मुख्य आधार रहा है और जो किसी भी पैमाने पर, दूसरी किसी भी शक्ति से काफी आगे है। कुछ हद तक चीन भी। चीन, अपनी आर्थिक ताकत की वजह से, वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का एक-तिहाई हिस्सा संभालता है, और आज उसकी आर्थिक क्षमताएं राजनीतिक प्रभाव में बदल रही हैं। असल में, एक तरह से यही हमारी चर्चा का मुख्य विषय है।
















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