श्योपुर
चीता पुनर्वास परियोजना के तहत कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीतों की मौत होने पर वास्तविक कारण पता नहीं चल पाता है। कई चीते संदिग्ध परिस्थतियों में भी मृत पाए गए, लेकिन मौत हादसे से हुई या बीमारी से, इसका पता नहीं चल पाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) में मांगे जाने पर जानकारी साझा करने से वन विभाग ने यह कह कर इन्कार कर दिया कि यह राष्ट्रीय विषय है।
वन विभाग बोला-रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती
विभाग से वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने आरटीआई में जानकारी मांगी थी, जिन्हें जबाव मिला कि आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)(ए) के तहत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती। यह धारा उन जानकारियों को छूट देती है, जिनके सार्वजनिक होने से भारत की संप्रभुता और अखंडता, सुरक्षा, रणनीतिक या आर्थिक हितों या किसी विदेशी देश के साथ संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता है।
अब तक शावकों सहित 28 चीतों की मौत हो चुकी है
गौरतलब है कि 17 सितंबर 2022 से शुरू हुई चीता परियोजना में अब तक शावकों सहित 28 चीतों की मौत हो चुकी है। 2026 में ही अब तक सात चीतों की मौत हुई है। 12 अक्टूबर को मृत मिले आशा चीता के शावक की मौत को लेकर भी सिर्फ इतना ही सामने लाया गया है कि वह मां के साथ नहीं दिखी। ढूंढने पर उसका शव मिला।
मौत बीमारी से हुई या किसी हादसे से, अब भी रहस्य
यह रहस्य ही बना हुआ है कि शावक की मौत बीमारी से हुई या किसी हादसे से। शव किस हालत में मिला, इसकी जानकारी भी नहीं मिल सकी है।














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