नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान के एक लेख को शेयर करते हुए एग्रीवोल्टाइक्स की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक कृषि गतिविधियों के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रधानमंत्री ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध करा सकता है, ऊर्जा लागत कम कर सकता है और फसल उत्पादकता को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने इसे ग्रामीण विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
गौरतलब है कि भारत 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में सातवें एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है, जिसकी थीम 'पावरिंग द ग्लोबल साउथ' रखी गई है।
लेख में प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स, जिसे एग्रीपीवी भी कहा जाता है, किसानों को एक ही भूमि पर खेती जारी रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का अवसर देता है। इससे किसानों की आय के स्रोत बढ़ सकते हैं और कृषि क्षेत्र में अनिश्चितताओं के बीच उनकी आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है।
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष स्थान दिए जाने की तैयारी है। इससे कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन को और गति मिलेगी और सिंचाई के सौरकरण के प्रयासों को मजबूत आधार मिलेगा।
मंत्रियों ने अपने लेख में उल्लेख किया कि भारत के लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। एग्रीवोल्टाइक्स उन्हें कृषि उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा, दोनों से आय अर्जित करने का अवसर दे सकता है।
उनके अनुसार, यह मॉडल बिजली बिक्री से अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के साथ-साथ डीजल और खरीदी गई बिजली पर निर्भरता कम कर सकता है। इसके अलावा यह सूक्ष्म जलवायु (माइक्रोक्लाइमेट) तैयार करने में मदद करता है, जिससे फसलों को अत्यधिक गर्मी, सूखे, तीव्र सौर विकिरण और ओलावृष्टि जैसी स्थितियों से सुरक्षा मिल सकती है।
लेख में कहा गया है कि एग्रीवोल्टाइक्स के व्यापक उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सौर अवसंरचना की स्थापना, रखरखाव और उससे जुड़ी कृषि सेवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एग्रीवोल्टाइक्स के सफल क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त फसलों का चयन, पर्याप्त सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और ऐसे डिजाइन आवश्यक होंगे जो खेती के लिए पर्याप्त सूर्य प्रकाश सुनिश्चित करें।
मंत्रियों ने कहा कि कृषि और ऊर्जा विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय इस मॉडल को सफल बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।















Leave a Reply