कुरुक्षेत्र
देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हरियाणा ने हर क्षेत्र में प्रतिभा को जन्म दिया है। चाहे वह खेल की बात हो, अन्न उत्पादन की बात हो या सीमाओं पर देश की रक्षा की बात हो।
यहां की बेटियां भी किसी मामले में पीछे नहीं हैं और हर क्षेत्र में न केवल प्रदेश, बल्कि देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका रही हैं। राष्ट्रपति रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में हरियाणा के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती राज्य स्तरीय समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
इससे पहले राष्ट्रपति उत्तर भारत के एकमात्र शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में पूजा अर्चना करने गईं। मंदिर में पूजा अर्चना के बाद राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में पहुंचीं, जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें शाल भेंट कर और प्रदेश के 60 वर्ष के विकास का प्रतीक स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने रिमोट का बटन दबाकर हीरक जयंती वर्ष का विधिवत शुभारंभ किया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में प्रदेश की बेटियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने सुचेता कृपलानी, शन्नो देवी, कल्पना चावला से लेकर मनु भाकर, स्वीटी बूरा और जैस्मीन जैसी दिग्गजों के नाम लेते हुए कहा कि हरियाणा की बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। इसके लिए उन्होंने हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तारीफ करते हुए कहा कि यह हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री की महिलाओं के प्रति सजगता और संवेदनशीलता का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण में पिछले एक दशक में हरियाणा में उल्लेखनीय तरक्की हुई है, जिसका परिणाम है कि हरियाणा की बेटियों ने देश का माथा विश्व में ऊंचा किया है। बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ की शुरुआत पानीपत की धरती से प्रधानमंत्री ने की, जिसका परिणाम है कि लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है।
कई परियोजनाओं का किया जिक्र
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सरकार की कई परियोजनाओं का जिक्र करते हुए तारीफ की। उन्होंने जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र करते हुए कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन इसी धरती से चली और यह आने वाले समय में देश की तरक्की में मिल का पत्थर साबित होगी। देश के खाद्यान्न भंडार भरने में हरियाणा का अहम योगदान है।
स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर देश की सीमाओं की रक्षा में साहसी सैनिक दिए हैं और आज भी यह परंपरा बरकरार है। उन्होंने कहा कि यह केवल वीरों की भूमि नहीं, बल्कि देवों की भूमि भी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा विश्व में भगवान श्रीकृष्ण का अमर संदेश फैलाने वाली धरती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गीता का संदेश देने वाली धरती श्रीकृष्ण के आदर्शों को आगे भी इसी प्रकार बनाए रखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा- मेहनती किसान, बहादुर जवान, धाकड़ खिलाड़ी, सशक्त नारी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के 60 वर्ष पूर्ण करने के इस अवसर पर राष्ट्रपति का अाशीर्वाद मिल रहा है, जो ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने 6 दशक में अप्रत्याशित प्रगति की है और इसमें प्रदेश के हर वर्ग का बहुमूल्य योगदान है। हरियाणा की धरती को मेहनती किसान, बहादुर जवान, धाकड़ खिलाड़ी और सशक्त नारी ने अपनी मेहनत के दम पर आज यहां पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा को 1966 में पिछड़ा कहा जाता था, लेकिन आज देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। यह सब किसान, व्यापारी, खिलाड़ी, उद्योगपतियों और माताओं की मेहनत का परिणाम है। प्रदेश की बेटियां खेत से मैदान तक और सेना से लेकर स्टार्टअप तक प्रदेश व देश का मान बढ़ा रही हैं। इसी कारण हमारे यहां कहावत मशहूर है – देशां म्है देश हरियाणा-जित दूध दही का खाणा।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि जब-जब देश का तिंरगा विश्व स्तर पर लहराता है तो उसमें हरियाणा की माटी की खुशबू जरूर होती है। हरियाणा क्षेत्रफल में भले छोटा है और देश के क्षेत्रफल का केवल 1.34 प्रतिशत है, लेकिन देश की जीडीपी में हरियाणा का योगदान 3.6 प्रतिशत है। प्रति व्यक्ति आय में भी प्रदेश सबसे अधिक है। देश की हर तीन में दो कारें, दूसरा ट्रैक्टर और 10 में से 6 मोटरसाइकिल हरियाणा की देन हैं।
राज्यपाल बोले – 1966 में संघर्ष कर रहे थे आज सेलिब्रेट कर रहे हैं
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि 1966 में जब हरियाणा बना तो प्रदेश और प्रदेशवासी संघर्ष कर रहे थे। आज 6 दशक हो चुके हैं, लेकिन आज प्रदेश और प्रदेशवासी सेलिब्रेट कर रहे हैं।
यह सब प्रदेशवासियों की अथक मेहनत को दर्शाता है। इसके लिए मुख्यमंत्री और उनकी टीम भी बधाई की पात्र है, जो डेडिकेशन के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री सैनी जनता से जो कमिटमेंट करते हैं, उसे पूरा करते हैं।
सुबह 9 बजे पहुंची भद्रकाली मंदिर
अंबाला से सड़क मार्ग के रास्ते राष्ट्रपति सुबह 9 बजे भद्रकाली मंदिर पहुंची। उन्होंने प्राचीन परंपरा के अनुसार श्री देवीकूप में मां सती का पूजन किया तथा परिक्रमा के बाद चांदी के अश्व मां के चरणों में समर्पित किए। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान स्वर्ण रजत पोशाक में सुसज्जित मां भद्रकाली के दर्शन एवं विधि-विधान से पूजन-अर्चना की। मां के पवित्र चांदी चरण का पंचामृत से पूजन करने के बाद श्रद्धापूर्वक मां की आरती की।
पीठाध्यक्ष पं. सतपाल शर्मा ने राष्ट्रपति को मंदिर की परंपरा एवं शक्ति उपासना के प्रतीक स्वरूप शक्ति चुनरी, शक्ति त्रिशूल, मां की सिद्ध अष्टधातु से निर्मित अष्टभुजा स्वरूप पूजा विग्रह, शक्ति अंक, महिषासुरमर्दिनी शंख एवं प्रसाद भेंट स्वरूप प्रदान किए। इस मौके पर उनके साथ हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी थे। फिलहाल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुकुल कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान शताब्दी समारोह में मौजूद हैं













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