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कटनी जिले ने मातृ एवं शिशु सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) का आंकड़ा लगभग शत-प्रतिशत तक पहुंच गया है। हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) की ओर से जारी अप्रैल 2025 से 31 मार्च तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल में कुल 23,234 प्रसव दर्ज किए गए। इनमें से 23,223 प्रसव सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षित रूप से कराए गए। पूरे जिले में घर पर प्रसव के केवल 11 मामले सामने आए हैं। जिले में संस्थागत प्रसव की दर लगभग 99.94% प्रतिशत के अनुसार, जिले में संस्थागत प्रसव की दर लगभग 99.94% रही, जबकि घर पर प्रसव का प्रतिशत मात्र 0.06% दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग इस सफलता का श्रेय ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ पहुंच, आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की जमीनी सक्रियता तथा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों को दे रहा है। कुछ वर्षों पहले तक कटनी के ग्रामीण इलाकों में जागरूकता के अभाव, परिवहन सुविधाओं की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों की दूरी के कारण घर पर प्रसव होना एक आम बात थी। यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए बेहद जोखिम भरा होता था। लेकिन बीते कुछ समय में जमीनी स्तर पर स्थितियों में तेजी से सुधार हुआ है। स्वास्थ्य अमला हाई अलर्ट पर रहता ‘जननी एक्सप्रेस’ की उपलब्धता, शासन की ओर से दी जाने वाली निशुल्क प्रसव सुविधाएं दी जाती है। गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी ने महिलाओं को अस्पतालों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वास्थ्य विभाग की रणनीति के तहत, गर्भवती महिला का पंजीकरण होते ही आशा और एएनएम कार्यकर्ता उनसे लगातार संपर्क में रहती हैं। प्रसव की संभावित तिथि (EDD) नजदीक आने पर स्वास्थ्य अमला हाई अलर्ट पर रहता है। प्रसव पीड़ा शुरू होते ही एम्बुलेंस के माध्यम से महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया जाता है। कटनी में सबसे ज्यादा डिलीवरी कटनी जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक जिले में कुल 23 हजार 234 प्रसव दर्ज किए गए, जिनमें से 23 हजार 223 प्रसव अस्पतालों में हुए। केवल 11 मामलों में ही घर पर प्रसव हुआ। आंकड़ों के अनुसार कटनी विकासखंड में सबसे अधिक 9 हजार 970 प्रसव दर्ज किए गए, जिनमें सिर्फ एक प्रसव घर पर हुआ। वहीं विजयराघवगढ़ विकासखंड ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूरे वर्ष में शून्य होम डिलीवरी का रिकॉर्ड बनाया। घर पर प्रसव के 6 मामले दर्ज बड़वारा और रीठी विकासखंड में भी स्थिति काफी बेहतर रही, जहां केवल एक-एक घर पर प्रसव का मामला सामने आया। बहोरीबंद विकासखंड में घर पर प्रसव के 6 मामले दर्ज हुए, जो जिले में सबसे अधिक हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 99 फीसदी से अधिक रहा। ढीमरखेड़ा में 2 घर पर प्रसव दर्ज किए गए। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लगातार जागरूकता अभियान और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से यह सुधार संभव हुआ है। सीएमएचओ डॉ. राज ठाकुर ने बताया कि जिले की इस उपलब्धि के पीछे आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी कर्मचारियों की मेहनत है। उन्होंने घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं और परिजनों को अस्पताल में प्रसव के फायदे समझाए। ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल, स्वास्थ्य शिविर और परामर्श कार्यक्रमों के जरिए लोगों में जागरूकता बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि अब विभाग का अगला लक्ष्य प्रसव के बाद मां और नवजात की बेहतर देखभाल, सही पोषण और शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करना है।
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कटनी में 99.94% डिलीवरी अस्पतालों में दर्ज:एक साल में घर पर सिर्फ 11 डिलीवरी; जननी एक्सप्रेस अभियान से बदली तस्वीर
















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