पुलिस कोर्ट की अनुमति बिना आगे जांच नहीं कर सकती:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा




इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी मामले में अदालत की अनुमति के बिना पुलिस दोबारा या आगे की जांच नहीं कर सकती। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही केस में बिना कोर्ट के आदेश के दो बार संज्ञान लेना उचित नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने सैयद मोहम्मद हमजा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। न्यायालय ने मामले में दाखिल दूसरी चार्जशीट, संज्ञान आदेश और डिस्चार्ज अर्जी खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया। यह मामला अंबेडकरनगर के मालीपुर थाने में वर्ष 2021 में दर्ज एक केस से संबंधित है। पहली जांच के बाद पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें हत्या की धारा शामिल नहीं थी। बाद में, पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस ने दोबारा जांच की और हत्या सहित अन्य गंभीर धाराएं जोड़ते हुए एक नई चार्जशीट दाखिल की। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पुलिस ने आगे की जांच शुरू करने से पहले ट्रायल कोर्ट से अनुमति नहीं ली, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ऐसी जांच के लिए अदालत की मंजूरी आवश्यक है। सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने भी सुनवाई के दौरान स्वीकार किया कि आगे की जांच अदालत की अनुमति के बिना की गई थी। इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि जब किसी मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी हो, तब उसी केस में दोबारा संज्ञान नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता की कानूनी दलीलों पर उचित विचार नहीं किया। न्यायालय ने 29 अप्रैल 2023 की दूसरी चार्जशीट, 3 फरवरी 2026 के संज्ञान आदेश और 13 फरवरी 2026 के डिस्चार्ज आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस और ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।



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