जैसलमेर की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में आत्मघाती ड्रोन वायु अस्त्र-1 का सफल परीक्षण किया गया है। ये ड्रोन दुश्मन के इलाके में डेढ़ घंटे तक टारगेट के लिए उड़ सकता है। इसके बाद हलचल मिलते ही हमला कर देता है।
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वहीं, इसी आधुनिक ड्रोन का टारगेट बदला या हमला रोका भी जा सकता है। पुणे की निजी डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी ‘नाइब लिमिटेड’ ने अपने स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम (आत्मघाती ड्रोन) ‘वायु अस्त्र-1’ का पहला टेस्ट किया।
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार ये टेस्ट पोकरण में 18 और जोशीमठ (उत्तराखंड) में 19 अप्रैल 2026 को किया गया था।
रेगिस्तान और पहाड़ों में हुए टेस्ट
- पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में रेतीले धोरों के बीच इसकी एंटी-पर्सनल (दुश्मन के सैनिकों और ठिकानों को तबाह करने की) मारक क्षमता और सटीक निशानेबाजी का परीक्षण किया गया।
- जोशीमठ-मलारी (उत्तराखंड) में 14,000 फीट से अधिक की दुर्गम ऊंचाई और शून्य से नीचे के तापमान वाले पहाड़ी क्षेत्र में इसके हाई-एल्टीट्यूड एंड्यूरेंस (ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता) को परखा गया।
100 किमी दूर का टारगेट हिट
टेस्ट में वायु अस्त्र-1 ने अपनी पहली ही कोशिश में 100 किलोमीटर दूर का टारगेट हिट किया। इस ड्रोन ने 10 किलोग्राम वजनी विस्फोटक के साथ उड़ान भरी थी।
सबसे खास बात यह रही कि इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 1 मीटर से भी कम दर्ज किया गया। ड्रोन तय टारगेट से एक मीटर भी इधर-उधर नहीं भटका और उसने सीधे टारगेट पर अटैक कर दिया।

वायु अस्त्र-1 को रेगिस्तान से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक आसानी से ऑपरेट किया जा सकता है।
‘स्मार्ट मिशन कंट्रोल’ से है लैस- बीच हवा में बदल सकता है फैसला
- मिशन रद्द करने की क्षमता- यदि उड़ान भरने के बाद परिस्थितियां बदलती हैं या टारगेट की लोकेशन बदल जाती है, तो इस ड्रोन का मिशन बीच हवा में ही रोका जा सकता है। अगर पहला हमला चूक जाता है या दुश्मन अपनी जगह बदल लेता है, तो यह हवा में ही युद्धाभ्यास करते हुए दूसरे टारगेट पर अटैक कर सकता है।
- सुरक्षित वापसी- यदि किसी कारणवश मिशन को पूरी तरह रद्द कर दिया जाता है, तो इसमें मौजूद कंट्रोल ट्रांसफर फंक्शन्स की मदद से इसे सुरक्षित वापस बेस पर लैंड कराया जा सकता है, जिससे इसका दोबारा इस्तेमाल संभव हो जाता है।
- हवा में मंडराने की ताकत- यह सिर्फ एक मिसाइल की तरह सीधा जाकर नहीं टकराता। यह दुश्मन के इलाके में 90 मिनट (डेढ़ घंटे) से ज्यादा समय तक एक्टिव रह सकता है। इसमें बेहद आधुनिक इन्फ्रारेड (IR) कैमरे लगे हैं। इसकी वजह से यह रात के घने अंधेरे में भी दुश्मन के टैंकों और गाड़ियों को ढूंढकर उन्हें नष्ट कर सकता है।
- ऊंचे पहाड़ों पर भी कारगर- यह 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर, जहां ऑक्सीजन कम होती है और भयंकर ठंड होती है, वहां भी बिना किसी रुकावट के उड़ान भर सकता है। कंपनी ने मुख्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS) से 70 किमी दूर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल सेगमेंट को म्यूनिशन का ऑपरेशनल कंट्रोल (नियंत्रण) पूरी तरह ट्रांसफर करने की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया।

वायु अस्त्र 1 की टेस्टिंग उत्तराखंड और राजस्थान के जैसलमेर में की गई।
रात के अंधेरे में भी हमला
रेगिस्तान और पहाड़ों में दिन के परीक्षणों के अलावा, ‘वायु अस्त्र-1’ का नाइटरटाईम एंटी-आर्मर स्ट्राइक (रात के समय बख्तरबंद वाहनों पर हमला) परीक्षण भी किया गया। रात के अंधेरे में भी दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को खोजकर उन पर सटीक हमला करने क भी टेस्ट किया गया।
भारत में बनाई जाएगी ड्रोन फोर्स
ऑपरेशन सिंदूर, रूस-यूक्रेन और अमेरिका-इजराइल-ईरान जंग के बाद भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक ‘ड्रोन फोर्स’ बनाने का फैसला किया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (पहली जवाबी कार्रवाई) के तौर पर तैनात की जाएगी। पूरी खबर पढ़िए…














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