आगरा में दिव्यांग का अनोखा प्रदर्शन, शिकायतों को लटकाकर पहुंचा:व्हील चेयर पर लिखा-मैं हूं कॉकरोच, डेढ़ साल से लगा रहा चक्कर




आगरा कलेक्ट्रेट में मंगलवार को दो युवक व्हील चेयर पर मेडिकल रिपोर्ट और शिकायतों की लड़ी लटका कर पहुंचे। उन्होंने अपनी व्हील चेयर पर ‘मैं हूँ कॉकरोच’ का पोस्टर लगा रखा था। आरोप था कि सिस्टम की लापरवाही के चलते वो परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के असंवदेनशील व्यवहार के चलते वो एक साल से न्याय के लिए भटक रहे हैं। मंगलवार को व्हील चेयर पर बैठकर कलेक्ट्रेट पहुंचे मिढ़ाकुर निवासी जोगेंद्र ने बताया कि वो पहले कमर्शियल गाड़ी चलाते थे। उनका आरोप है कि मिढ़ाकुर स्थित एम.एस. पब्लिक स्कूल के संचालक ने उनसे जबरन बेलदारी (मजदूरी) कराई। इसी दौरान वो छत से गिर गया। उनकी रीढ़ की हड्डी पर आ गिरा। स्कूल मालिक के कहने पर खेरिया मोड़ स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। वहां पर डॉक्टर ने रीढ़ की हड्‌डी का ऑपरेशन किया। इसके बाद उनके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया। वो हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गए। उन्होंने हॉस्पीटल के खिलाफ शिकायत की। उनका आरोप है कि जब जिलाधिकारी से गुहार लगाई, तो सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) कार्यालय ने बिना किसी शारीरिक जांच के, घर बैठे डाक से एक रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जोगेंद्र को पहले से लकवा था और वह अपने घर पर गिरे थे। इस झूठी रिपोर्ट के सदमे और आर्थिक तंगी के कारण जोगेंद्र की पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई। आज स्थिति यह है कि इलाज के अभाव में जोगेंद्र के दोनों पैरों में इन्फेक्शन फैल रहा है। वो मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ अपनी पीड़ा को व्यक्त करने पहुंचे। अपनी व्हील चेयर पर पिछले एक साल में कराई गई जांच रिपोर्ट, शिकायतों की लड़ी लटककर लाए। बिना टीबी के दे दी टीबी की दवा, मानसिक संतुलन खो बैठी बहन दूसरा मामला सौ फुटा रोड स्थित ‘श्रीजी हॉस्पिटल’ का है। कलेक्ट्रेट पहुंचे जयप्रकाश ने बताया कि डॉक्टरों ने उनकी बहन कविता को बिना टीबी हुए ही टीबी की हैवी डोज दे दी। जब बहन की हालत बिगड़ी, तो जयप्रकाश ने उसे एस.एन. मेडिकल कॉलेज सहित आगरा के छह बड़े अस्पतालों में दिखाया, जहां डॉक्टरों ने साफ कहा कि लड़की को टीबी थी ही नहीं। गलत इलाज के कारण आज कविता अपना मानसिक संतुलन खो चुकी है। जयप्रकाश ने बताया कि सीएमओ की जांच कमेटी ने डॉक्टरों को दोषी भी माना है, लेकिन रसूख के आगे कार्रवाई की फाइल दबा दी गई है। अब पीड़ित को थाने और कलेक्ट्रेट के चक्कर कटवाए जा रहे हैं और आरोपी डॉक्टर खुलेआम धमकियां दे रहे हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *