इलाज का जो ज्ञान गूगल में नहीं, वह बकेला के बैगा के पास



भास्कर न्यूज | कवर्धा आज जब हर सवाल का जवाब लोग गूगल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में तलाश रहे हैं। तब कबीरधाम जिले के मैकल पर्वत की गोद में बसे छोटे से गांव बकेला में एक ऐसा ज्ञान अगली पीढ़ी को सौंपा जा रहा है, जो न किसी सर्च इंजन में मिलेगा। यह ज्ञान है प्रकृति को पढ़ने का। जंगल को समझने और पेड़-पौधों में छिपे उपचार को पहचानने का। बैगा समाज छत्तीसगढ़ और ग्रामोदय ग्राम विकास समिति की पहल पर स्व. शिकारी बैगा शासकीय प्राथमिक स्कूल के बच्चों को बकेला वन भ्रमण कराया। बच्चों को क्लास रूम से बाहर निकाला गया। जंगलों और तालाबों के बीच ले जाया गया। स्व. शिकारी बैगा जिनके नाम पर स्कूल है के वंशज केवल सिंह चिखलिया ने बच्चों को तालाब के पास ले जाकर जल संरक्षण और जैव विविधता का महत्व बताया। सुबह 5 बजे शुरू हुई जंगल की पाठशाला जंगल की यह पाठशाला सुबह 5 बजे शुरू हुई। भोर की पहली किरण के साथ बच्चों का समूह जंगल की ओर निकला। मैकल की हरियाली दिखी। पक्षियों की आवाज सुनाई दी। तालाब के पास की शांति मिली। बच्चों ने अपने आसपास की दुनिया को नए नजरिए से देखा। बैगा समाज छग के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी मछिया ने बच्चों को जंगल में मौजूद औषधीय पौधों की पहचान कराई। उन्होंने इससे जुड़ी जानकारी दी।



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