'किसी स्कूल में बच्चे का धर्म-परिवर्तन नहीं हुआ':पीएमश्री विद्यालय में हिजाब-टोपी पर बोले- माहौल खराब और बदनाम करने की कोशिश




संभल के समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने स्कूलों में धार्मिक शिक्षा और धर्मांतरण के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को माहौल खराब करने और बदनाम करने की कोशिश बताया। सांसद ने कहा कि टोपी और हिजाब जैसे धार्मिक वस्त्र मुस्लिम बच्चे पहनते हैं, लेकिन स्कूलों में इन्हें लेकर एकतरफा रवैया अपनाया जा रहा है। सांसद बर्क ने संभल के थाना नखासा क्षेत्र के मोहल्ला दीपा सराय स्थित अपने आवास पर मीडिया से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों में धार्मिक और दुनियावी दोनों तरह की शिक्षा दी जाती है, लेकिन सामान्य स्कूलों और कॉलेजों में धार्मिक शिक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाने वालों को चुनौती देते हुए कहा कि वे यह साबित करें कि किसी स्कूल में बच्चों का धर्मांतरण हुआ है। सांसद बर्क ने बच्चों को आपस में बांटने के प्रयासों की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस उम्र में बच्चों को यह पता नहीं होता कि उनके साथ बैठा बच्चा किस धर्म से है। जियाउर्रहमान बर्क ने चेतावनी दी कि अगर अभी से बच्चों के बीच राजनीति और धर्म की दीवार खड़ी की जाएगी, तो भविष्य में उनके मन में दूरियां पैदा होंगी। उन्होंने इस कदम को समाज में जहर घोलने जैसा बताया और इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने दोहराया कि संभल के किसी भी स्कूल में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, न ही किसी शिक्षक ने बच्चों को बांटने का प्रयास किया है। सांसद ने उदाहरण दिया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान गैर-मुस्लिम बच्चे टोपी पहनते हैं और मुस्लिम बच्चे हिंदू समाज के वस्त्र पहनते हैं। उस समय बच्चे इसे एक सांस्कृतिक गतिविधि का हिस्सा मानते हैं, न कि किसी विशेष धर्म का वस्त्र। सांसद बर्क ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बच्चों के मन में धार्मिक छाप छोड़ना चाहते हैं, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों में राजनीतिक लाभ उठाना हो सकता।



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