छावनी…:10 के बजाय 20 फीट तक तोड़े मकान, मलबा भी नहीं उठा रहे




मधुमिलन चौराहे से छावनी और जगन्नाथ धर्मशाला तक 136 साल पुरानी बसाहट मलबे में तब्दील हो गई है। जनता विकास और सड़क चौड़ीकरण के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस जल्दबाजी में कार्रवाई हुई, उसने लोगों की जीवनभर की कमाई मिट्‌टी में मिला दी है। करीब 20 हजार वर्गफीट जमीन गई है, लेकिन मुआवजे के नाम पर टीडीआर पॉलिसी दी जा रही है, जिसकी शहर में अभी खरीद-फरोख्त ही शुरू नहीं हो सकी है। मलबा भी लोगों को खुद उठाना पड़ रहा है। निशान से ज्यादा तोड़ा, मोहलत भी नहीं दी
यहां जमीन की कीमत 20 हजार रुपए वर्गमीटर है। लोगों के पास वैध रजिस्ट्रियां हैं। सालों से संपत्ति कर चुका रहे हैं। नियमानुसार 7 दिन का नोटिस मिलना था, लेकिन 1-2 दिन पहले सूचना दी गई। चलते ट्रैफिक में लोग चाहकर भी खुद सामान नहीं हटा पाए। लोगों का आरोप है कि विरोध करने पर निगम कर्मियों ने हवालात में अंदर कराने की धमकी दी। 136 साल पुरानी छावनी मलबे का ढेर बन गई है… लोगों में सड़क चौड़ीकरण से ज्यादा नाराजगी अमले के रवैये से है। कई के मकान निशान से ज्यादा तोड़े, सामान निकालने का वक्त भी नहीं दिया। आप बीती – सामान तक नहीं निकालने दिया विजय मंगल (व्यवसायी): यह हमारी पुश्तैनी जमीन है। निशान 10 फीट का लगाया था, लेकिन 15 फीट तक तोड़ दिया गया।
चेतन गंगवाल: 55 साल से रह रहे हैं। मशीन का पंजा ज्यादा मार दिया, एलिवेशन खराब हो गया। ठीक कराने में 5 लाख लगेंगे।
सुषमा व राजेंद्र पांडे (रिटायर्ड शिक्षक): हाथ जोड़कर अलमारी निकालने का समय मांगा, पर नहीं दिया। उलटा धमकाया।
धरम शर्मा: 1980 में मकान लिया था। 8.5 की जगह 15 फीट तोड़ा। 45 हजार महीने का किराया खत्म, 20 लाख का नुकसान भी।
भारती श्रीवास्तव: घर में शादी थी, एक दिन पहले बहू विदा हुई। सामान नहीं निकालने दिया, मलबा हटाने के 1000 रु. मांग रहे हैं।
सुरेश बंसल: आधा घंटा भी नहीं दिया, सामान मलबे में दब गया। सामान निकालने के लिए लोग ही मलबा नहीं उठाने दे रहे
मलबा हम ही उठवाते हैं, ठेकेदार के कॉन्ट्रेक्ट में मलबा ले जाने का काम भी शामिल रहता है। लोगों ने ही रोक रखा है। उनको कुछ सामान, लोहे के सरिए आदि लेना है, इसलिए हमें मना किया है। वरना हम ही उसे हटवा दें। – अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त



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