जैन समाज बोला- ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ लागू करें:रीवा में साध्वियों की मौत पर खंडवा में मौन जुलूस, निष्पक्ष जांच की मांग रखी




रीवा में हुए एक सड़क हादसे में दो जैन आर्यिका माताजी की दर्दनाक मौत के बाद जैन समाज में गहरा आक्रोश और शोक व्याप्त है। घटना के विरोध में सोमवार को सकल जैन समाज, खंडवा ने शहर में शांतिपूर्ण मौन रैली निकाली और प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज ने मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ देशभर में विहाररत संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग उठाई। बड़ी संख्या में समाजजन घंटाघर स्थित जैन कीर्ति स्तंभ पर एकत्रित हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर समाजजन शांतिपूर्ण मोहन रैली के रूप में घंटाघर, मुंबई बाजार और रेलवे स्टेशन चौराहा होते हुए कंट्रोल रूम पहुंचे, जहां तहसीलदार महेश कुमार सोलंकी और कोतवाली टीआई प्रवीण आर्य को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान रैली में बड़ी संख्या में मातृशक्ति भी मौजूद रहीं। समाज बोला- केवल सड़क हादसा नहीं, कई सवाल खड़े करती है घटना सकल जैन समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि समाज इस घटना को सामान्य सड़क दुर्घटना मानने को तैयार नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज और परिस्थितियां कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। समाज ने मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) अथवा न्यायिक स्तर पर कराने की मांग की है। क्या है पूरा मामला 20 मई की सुबह करीब 6.30 बजे रीवा में जैन साध्वियां निहार क्रिया से लौट रही थीं। इसी दौरान एक तेज रफ्तार कार ने आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी और आर्यिका श्री उपशममति माताजी को टक्कर मार दी। हादसे के बाद कार ड्राइवर मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल दोनों साध्वियों का बाद में समाधि मरण हो गया। घटना के बाद से देशभर के जैन समाज में रोष का माहौल बना हुआ है। समाज का कहना है कि संतों की सुरक्षा को लेकर शासन और प्रशासन को गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग समाज ने प्रशासन से मांग की है कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो क्लिप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो और सच्चाई सामने आ सके। ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की मांग समाज के ज्ञापन में विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। समाज ने कहा कि संतों के विहार मार्गों पर पुलिस समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था और हाईवे पर चेतावनी संकेतक लगाए जाने चाहिए। इसके साथ ही केंद्र सरकार से पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा गाइडलाइन और SOP तैयार करने की मांग की गई। ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी में रखा जाए ऐसे अपराध ज्ञापन सौंपने पहुंचे अभय जैन, विकास बोथरा, वीरेंद्र जैन, अशोक पालीवाल और पंकज जैन ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक और निहत्थे होते हैं। वे आत्मरक्षा के लिए किसी साधन या वाहन का उपयोग नहीं करते। ऐसे में उनके खिलाफ होने वाले अपराधों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए। समाज ने प्रशासन और जैन समाज के बीच बेहतर समन्वय के लिए “संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल” गठित करने की भी मांग की, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत संपर्क और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। “संतों की सुरक्षा नैतिक जिम्मेदारी” समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जैन समाज हमेशा शांति, अहिंसा और कानून व्यवस्था में विश्वास रखने वाला समाज रहा है। इस आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। समाज ने कहा कि जो संत स्वयं निहत्थे रहकर मानवता को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं, उनकी सुरक्षा करना शासन और समाज दोनों की नैतिक जिम्मेदारी है। रैली और ज्ञापन कार्यक्रम में समाज अध्यक्ष वीरेंद्र भटयाण, दिलीप पहाड़िया, संजय जैन, पंकज छाबड़ा, विजय सेठी, नवनीत जैन, नितिन जैन, सौभाग सांड, चंद्रकांत सांड, संजय पंचोलिया, राजेंद्र छाबड़ा, विजय जैन, प्रेमांशु चौधरी, अविनाश जैन, तरुण जैन आदि मौजूद थे।



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