डिजिटल जनगणना…:मप्र में उम्मीद से 1.44 लाख ज्यादा मिले मकान; गांव 100% के पार




मप्र में डिजिटल जनगणना (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक फील्ड वर्क) अपने आखिरी पड़ाव पर है। 23 मई की सुबह तक के आधिकारिक आंकड़ों ने प्रदेश के विकास और प्रशासनिक कार्यशैली की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। राज्य ने सामूहिक रूप से 100.61% की ऐतिहासिक प्रगति हासिल कर इतिहास रच दिया है। केंद्र और राज्य सरकार ने पुराने रिकॉर्ड के आधार पर अनुमान लगाया था कि पूरे मप्र में कुल 2 करोड़ 36 लाख 74 हजार 662 मकान होंगे, लेकिन जब 1.24 लाख से ज्यादा प्रगणक जमीन पर उतरे तो अब तक 2 करोड़ 38 लाख 19 हजार 058 मकान मिल चुके हैं। यानी सरकारी फाइलों के मुकाबले जमीन पर 1 लाख 44 हजार 396 ज्यादा मकान दर्ज किए गए हैं, जो यह साबित करता है कि पिछले कुछ सालों में नए मकानों और कॉलोनियों के निर्माण की रफ्तार सरकारी अनुमानों से कहीं ज्यादा तेज रही है। मप्र के 1.37 लाख ब्लॉकों में से 2 में काम शुरू नहीं हुआ, ये दोनों भोपाल के छोटे जिलों ने महानगरों का गुमान तोड़ा 1. खंडवा ग्रामीण VS उज्जैन नगर निगम
खंडवा के ग्रामीण अमले ने कमाल करते हुए 107.55% लक्ष्य हासिल किया और पूरे प्रदेश में टॉप पर है, जबकि उज्जैन नगर निगम क्षेत्र महज 94.51% के साथ सबसे निचले पायदान पर है। 2. नया जिला पांढुर्णा VS राजधानी भोपाल
छिंदवाड़ा से अलग होकर बना नया जिला पांढुर्णा सीमित अमले के बावजूद 102.39% पर है। वहीं, भोपाल जिला केवल 98.14% पर ही पहुंच सका है। 3. झाबुआ-अलीराजपुर VS इंदौर नगर निगम
कठिन भौगोलिक रास्तों के बावजूद अलीराजपुर 101.29% और झाबुआ 100.92% ने 100% का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके विपरीत, इंदौर का नगर निगम क्षेत्र अभी 97.25% पर अटका हुआ है। कहां कितनी रफ्तार? 1. चंबल-ग्वालियर : ग्वालियर जिला 102.49%, गुना 102.61% और शिवपुरी 101.73% उम्मीद से कहीं आगे चल रहे हैं। ग्वालियर नगर निगम 100.09% और मुरैना नगर निगम 97.34% पर संघर्ष कर रहा है। मुरैना जिला 100.26% पर है। 2. बुंदेलखंड : सबसे छोटे जिले निवाड़ी ने 102.63% तो सागर जिला 100.16% पर है, लेकिन सागर नगर निगम अभी भी 96.44% पर अटका हुआ है। टीकमगढ़ ने 100.82% और दमोह ने 100.44% की मजबूत स्थिति बनाई है। 3. मध्य क्षेत्र और मालवा : राजगढ़ 104.62% के साथ अंचल में सबसे आगे है। धार 101.55%, शाजापुर 101.44% और मंदसौर 101.33% ने शानदार प्रदर्शन किया है। आखिर बड़े शहरों में क्यों लग रहा है “ताला’ : इसके तीन मुख्य कारण सामने आए हैं। 1. इंदौर, भोपाल और उज्जैन की पॉश कॉलोनियों और ऊंची सोसायटियों में प्रगणकों को सुरक्षा कारणों और कड़े नियमों की वजह से आसानी से एंट्री नहीं मिलती। 2 . शहरों में दिन के समय पति-पत्नी दोनों के काम पर होने के कारण घरों में ताले लटके मिलते हैं, जिससे “अपेक्षित मकानों’ का डिजिटल वेरिफिकेशन नहीं हो पा रहा है। 3. पूरे मप्र के 1.37 लाख से ज्यादा ब्लॉकों में से केवल 2 ब्लॉक ऐसे हैं, जहां काम अब तक शुरू ही नहीं हो सका है और ये दोनों ब्लॉक भोपाल नगर निगम सीमा में आते हैं।



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