पर्यावरण मंजूरी:केंद्र बना रहा नई संस्था, सिया की आपत्ति




पर्यावरणीय मंजूरी देने के लिए राज्यों में मौजूद स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) के ऊपर केंद्र सरकार एक नई संस्था का गठन करने जा रही है। इसका नाम होगा स्थायी पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसएईआईए यानी सैय्या)। इसके चेयरमैन राज्यों में पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव होंगे। दावा है कि अभी सिया और सिएक का कार्यकाल खत्म होने के कारण विकास परियोजनाएं बीच में ही लटक जाती थीं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकारी ‘स्टैंडिंग बॉडी (स्थायी निकाय) के गठन करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसको लेकर एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर मध्यप्रदेश समेत सभी राज्यों से सुझाव और आपत्तियां बुला ली हैं। यह है केंद्र का तर्क- केंद्र से नोटिफिकेशन में हो गया है कि जब राज्यों में सिया या सिएक का पुनर्गठन वक्त पर नहीं हो पाता, या किसी वजह से काम नहीं हो पाता, तो पर्यावरण मंजूरी (ईसी) की प्रक्रिया ठप हो जाती थी। फाइलें थोक में केंद्र के पास भेज दी जाती हैं। इस कारण पर्यावरणीय मूल्यांकन की समय-सीमा बढ़ जाती है और निवेशकों का भरोसा डगमगाता था। इसी ‘डेडलॉक’ को तोड़ने के लिए ही स्थायी प्राधिकरण और स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव है। मप्र की सिया ने केंद्र के नोटिफिकेशन पर उठाए गंभीर सवाल- “यह संशोधन उन दोषी अधिकारियों को बचाने के लिए है, जिन्होंने अवैध रूप से 237 पर्यावरण अनुमतियां जारी कीं” इधर, मप्र स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) ने केंद्र के 5 मार्च 2026 के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है। केंद्र को भेजी आपत्ति में मप्र सिया चेयरमैन ने दावा किया है कि यह संशोधन मप्र के उन दोषी अधिकारियों को बचाने के लिए लाया गया है, जिन्होंने अवैध रूप से 237 पर्यावरण अनुमतियां (EC) जारी की हैं। मप्र के प्रमुख सचिव (पर्यावरण) और सदस्य सचिव पर आरोप है कि उन्होंने आपराधिक षड्यंत्र के तहत 83 दिनों तक बैठकें नहीं होने दीं और चेयरमैन की जानकारी के बिना अवैध अनुमतियां जारी कीं। आपत्ति के अनुसार, इस बदलाव से सिया और सिएक जैसी संस्थाएं अफसरों की कठपुतली बन जाएंगी। यदि संस्थाएं अधिकारियों के अनुरूप कार्य नहीं करेंगी, तो अफसर 45 दिन तक बैठक नहीं होने देंगे, जिससे मामला स्वतः स्टैंडिंग अथॉरिटी (सैय्या) के पास चला जाएगा। इससे अफसरों को मनमानी की छूट मिलेगी। केंद्र प्रस्ताव पर क्यों उठ रहे सवाल ? केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब मध्यप्रदेश में स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी और राज्य के पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के बीच खींचतान चल रही है। सिया के एप्रेजल के बिना पिछले साल पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी के अनुमोदन से प्रभारी मेंबर सेक्रेटरी ने खनन से जुड़ी 237 मामले में डीम्ड ईसी जारी कर दी थी। इसका खुलासा होने के बाद कोठारी को पर्यावरण विभाग से हटा दिया गया। पर्यावरण विभाग के मौजूदा एसीएस अशोक बर्णवाल और सिया चेयरमैन के बीच भी डीम्ड ईसी की वैधानिकता पर मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। नई स्थाई इकाइयां कब-कैसे संभालेंगी कमान कुछ इस तरह होगा इन नई इकाइयों का स्वरूप



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