पावर प्लांट दक्षता पर तकनीकी व्याख्यान आयोजित:विशेषज्ञों ने ऊर्जा संरक्षण, आधुनिक तकनीकों पर की चर्चा




लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) यू.पी. स्टेट सेंटर में शनिवार को एक तकनीकी व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का विषय ‘ऑप्टिमाइजेशन ऑफ पावर प्लांट – ए केस स्टडी’ था। कार्यक्रम में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, अभियंताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र पावर प्लांट्स की कार्यक्षमता बढ़ाना, ऊर्जा संरक्षण और आधुनिक तकनीकों का उपयोग रहा। मुख्य अतिथि इं. वी.बी सिंह ने देश में बढ़ती ऊर्जा मांग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पावर प्लांट्स की दक्षता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इं. सिंह ने आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता वाले कोयले और ऊर्जा संरक्षण उपायों को अपनाकर बिजली उत्पादन को अधिक प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने अभियंताओं और विद्यार्थियों से नई तकनीकों के अध्ययन और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। पावर प्लांट ऑप्टिमाइजेशन के तकनीकी पर चर्चा दुबई स्थित NASH इंजीनियरिंग ग्रुप के पूर्व ग्रुप जनरल मैनेजर इं. एम. एम. खान ने मुख्य वक्ता के रूप में पावर प्लांट ऑप्टिमाइजेशन के तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि भारतीय कोयले में राख की मात्रा अधिक और ऊष्मीय क्षमता कम होने के कारण यहां के तापीय विद्युत संयंत्र विदेशी प्लांट्स की तुलना में कम दक्षता पर कार्य करते हैं। इं. खान ने स्पष्ट किया कि भारत में उपयोग होने वाले कोयले की कैलोरिफिक वैल्यू लगभग 3000 से 4000 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम होती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आयातित कोयले की क्षमता 6000 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम या उससे अधिक होती है। विकसित देशों में अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर इं. खान ने आगे बताया कि भारत के पारंपरिक सबक्रिटिकल तापीय संयंत्र लगभग 33 से 37 प्रतिशत दक्षता पर काम करते हैं। इसके विपरीत, सुपरक्रिटिकल और अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक वाले आधुनिक संयंत्रों की दक्षता 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विकसित देशों में अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर नियंत्रण प्रणालियों के कारण पावर प्लांट्स की कार्यक्षमता और अधिक है। भारत में भी एनटीपीसी और निजी कंपनियां अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक अपनाकर दक्षता सुधारने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।



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