पिटाई से युवक की मौत, गुस्साए घरवालों ने घेरा थाना:प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया, एसडीओपी के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त




महासमुंद के बागबाहरा क्षेत्र के ग्राम कुसमी निवासी 23 वर्षीय युवक चितरंजन पटेल की इलाज के दौरान मौत के बाद ग्रामीणों और घरवालों ने कोमाखान थाना का घेराव किया। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही बरतने और आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। आक्रोशित ग्रामीणों ने थाना परिसर में पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी। सूचना मिलने पर बागबाहरा एसडीओपी अजय शंकर त्रिपाठी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों और ग्रामीणों को मामले में कड़ी कार्रवाई और हत्या की धारा जोड़कर जांच करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। अब जानिए पूरा मामला जानकारी के अनुसार, ग्राम कुसमी निवासी चितरंजन पटेल (23) की गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। युवक पिछले कई दिनों से गंभीर हालत में भर्ती था। उसकी मौत की खबर मिलते ही घरवालों और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश फैल गया। घरवालों का आरोप है कि युवक के साथ हुई गंभीर मारपीट के मामले में पुलिस ने शुरुआत से ही लापरवाही बरती। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण शुक्रवार दोपहर ग्रामीणों के साथ वे कोमाखान थाना पहुंचे और धरने पर बैठ गए। बताया जा रहा है कि चितरंजन अपने माता-पिता लीलाबाई और आशाराम पटेल के बजाय ग्राम बकमा में अपनी नानी के यहां रहता था। 15 अप्रैल को वह एक शादी समारोह में शामिल होने निकला था। इसी दौरान लामी के पास स्थित एक पोल्ट्री फार्म के करीब अवैध शराब कारोबार से जुड़े तीन लोगों ने उसे रोक लिया। किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो मारपीट में बदल गया। आरोप है कि तीनों आरोपियों ने चितरंजन की बेरहमी से पिटाई की और उसे लहूलुहान हालत में सड़क किनारे छोड़कर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने घायल युवक को बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया था। मां बोली- पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया मृतक की मां लीलाबाई पटेल ने आरोप लगाया कि मारपीट इतनी गंभीर थी कि युवक के पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने बताया कि घटना की रिपोर्ट कोमाखान थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने आरोपियों पर केवल मामूली धाराएं लगाकर उन्हें छोड़ दिया। घरवालों का कहना है कि कई बार शिकायत और निवेदन करने के बाद भी पुलिस ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से आरोपियों के हौसले बढ़ते गए और समय पर कार्रवाई न होने से युवक की जान चली गई। ग्रामीणों ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर शुरू में ही गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई कर दी जाती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। इलाज के दौरान युवक की मौत हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे महासमुंद रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, जहां लंबे समय तक इलाज चलता रहा। हालत में सुधार नहीं होने पर दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन आखिरकार इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले को लेकर बागबाहरा एसडीओपी अजय शंकर त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीणों और परिजनों को समझाइश दी गई है। मामले में अब धारा 302 के तहत अपराध कायम कर आगे की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।



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