बरेली में फर्जी कार लोन गैंग का भंडाफोड़:बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा था खेल, 3 आरोपी अरेस्ट; चार गाड़ियां बरामद




बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से महंगी गाड़ियों का लोन लेकर उन्हें दूसरे राज्यों में बेच देता था। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए चार लग्जरी एसयूवी बरामद की हैं। प्रारंभिक जांच में एक बैंक कर्मचारी सहित कई स्थानीय लोगों की संलिप्तता के संकेत भी मिले हैं। पुलिस को 22 मई की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग फर्जी कागजातों के आधार पर फाइनेंस कराई गई गाड़ियों को इकट्ठा कर उन्हें बाहर बेचने की तैयारी में हैं। यह वाहन 99 बीघा मैदान में खड़े किए गए थे। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में बारादरी पुलिस ने मौके पर छापा मारा और दो आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। दो आरोपी गिरफ्तार, चार लग्जरी SUV बरामद
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गार्डन सिटी निवासी मोहम्मद शमी उर्फ शेरा और उनके बेटे मोहम्मद सैराब के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से चार लग्जरी एसयूवी बरामद की हैं, जिनमें एक किया कैरेन्स और तीन हुंडई क्रेटा शामिल हैं। बरामद वाहनों के नंबर UP25EL9286, UP25EM7079, UP25EH8824 और UP25EJ3091 बताए गए हैं। फर्जी दस्तावेजों से चलता था पूरा खेल
पूछताछ में आरोपी सैराब ने खुलासा किया कि गिरोह फर्जी आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र तैयार कर लोगों के नाम पर वाहन फाइनेंस कराता था। इसमें एक कथित बैंक कर्मचारी रविंद्र कुमार निश्छल की भूमिका भी सामने आई है। लोन स्वीकृत होने के बाद इन वाहनों को अलग-अलग जिलों और राज्यों में बेच दिया जाता था। बैंकिंग सिस्टम पर भी उठे सवाल
पुलिस जांच में अब तक सात वाहनों का पता चला है, जिनमें से तीन पहले ही बेच दिए गए थे। इस मामले ने बैंकिंग सत्यापन प्रक्रिया और लोन मंजूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल बरेली तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य जिलों और राज्यों तक फैला हो सकता है। फिलहाल आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई गई है।



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