यूपी में पंचायत चुनाव के लिए OBC आयोग बना:रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह अध्यक्ष; इनकी रिपोर्ट पर आरक्षण तय होगा




यूपी सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (ओबीसी आयोग) का गठन कर दिया है। आयोग का कार्यकाल 6 महीने का होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज राम औतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही आयोग में 2 रिटायर्ड अपर जिला जज और 2 रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शामिल किए गए हैं। आयोग की रिपोर्ट नवंबर 2026 तक आ सकती है। इसके बाद आरक्षण तय होगा। साफ हो गया है कि पंचायत चुनाव विधानसभा- 2027 के बाद ही हो सकेंगे। 4 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने सरकार को आयोग गठन का आदेश दिया था। जानिए, कौन हैं राम औतार सिंह? पिछड़ा आयोग का गठन क्यों हुआ?
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सर्वे के आधार पर ही यह तय होगा कि आपके क्षेत्र की कौन-सी पंचायत सीट ओबीसी (महिला या पुरुष) के लिए आरक्षित होगी और कौन-सी सामान्य रहेगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- स्थानीय निकायों (जैसे ग्राम पंचायत, जिला पंचायत) में ओबीसी आरक्षण देने से पहले राज्यों को ‘ट्रिपल टेस्ट’ यानी तीन-स्तरीय जांच के बाद प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस आयोग का गठन इसी ट्रिपल टेस्ट को पूरा करने के लिए किया गया है। आयोग ओबीसी समाज के आंकड़े जुटाएगा। अगर सरकार बिना आयोग की रिपोर्ट के सीधे आरक्षण लागू कर देती, तो मामला कोर्ट में फंस सकता था और पंचायत चुनावों पर रोक लग सकती थी। आयोग के गठन से अब चुनाव कानूनी रूप से सुरक्षित तरीके से कराए जा सकेंगे। आयोग के 3 मुख्य काम होंगे- आंकड़े जुटाना- आयोग यह जांच करेगा कि स्थानीय निकायों (ब्लॉक और पंचायत स्तर पर) में पिछड़ी जातियों की आबादी कितनी है और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कितनी आवश्यकता है। इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 50% की सीमा का ध्यान रखना- आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तीनों को मिलाकर कुल आरक्षण 50% से अधिक न हो। आरक्षण का अनुपात तय करना- आयोग की सिफारिशों के आधार पर हर स्थानीय निकाय में ओबीसी आबादी के अनुपात के अनुसार आरक्षित सीटों की संख्या तय की जाएगी। इसी महीने पूरा हो रहा पंचायत सदस्यों का कार्यकाल
यूपी में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था। पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल 25-26 मई 2026 तक पूरा हो रहा है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, मौजूदा कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नए चुनाव संपन्न हो जाने चाहिए थे। यानी यूपी में पंचायत चुनाव मई, 2026 से पहले या मई के महीने में ही होने तय थे। हालांकि, यूपी में चुनाव का ऐलान से पहले मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया। हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग बनाकर नए सिरे से आरक्षण का आदेश दिया। यही वजह है कि इस बार एक साल देर से चुनाव होगा। ऐसे में पंचायतीराज विभाग ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद कामकाज संभालने के लिए प्रशासक की नियुक्ति या प्रशासनिक समिति के गठन का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा है। कुछ दिनों में प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। हालांकि, करीब दो महीने पहले भास्कर को दिए इंटरव्यू में पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा था कि 12 जुलाई तक पंचायत चुनाव हो जाएंगे।
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