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मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल शहडोल जिले ने जल संरक्षण अभियान में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाया है। यह सफलता जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति द्वारा लागू की गई सख्त निगरानी प्रणाली और जनभागीदारी के कारण मिली है। इस प्रणाली में इंजीनियरों द्वारा प्रतिदिन सुबह और शाम वीडियो कॉल के माध्यम से कार्यों की लाइव रिपोर्टिंग शामिल है। सुबह ठीक 10 बजे, जिले के विभिन्न गांवों में तैनात इंजीनियर अपने मोबाइल कैमरे ऑन करते हैं। वे तालाबों, खेतों में बने कंटूर ट्रेंच या वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को दिखाते हैं। वीडियो कॉल पर जुड़े जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति मौके पर ही सवाल पूछते हैं, निर्देश देते हैं और प्रगति की समीक्षा करते हैं। शाम 7 बजे इसी प्रक्रिया को दोहराया जाता है, जहां इंजीनियरों को दिनभर की प्रगति बतानी होती है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के “जल संचय जन भागीदारी अभियान” के तहत शहडोल ने यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले में अब तक डेढ़ लाख से अधिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया गया है। इसके अतिरिक्त, 10 हजार से अधिक सोक पिट और 1500 से ज्यादा वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं तैयार की जा चुकी हैं। जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति ने बताया कि इस अभियान की तैयारी जनवरी माह से ही शुरू कर दी गई थी। लगभग तीन दर्जन इंजीनियरों को प्रतिदिन फील्ड में पहुंचकर काम की लाइव मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए थे। यह अनिवार्य था कि इंजीनियर उसी स्थान से वीडियो कॉल करें जहां वास्तव में कार्य चल रहा हो। जिला स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूम में इंजीनियरों द्वारा भेजे गए डेटा और फोटो का क्रॉस चेक भी किया जाता है। अभियान के दौरान जिले से अब तक 1 लाख 60 हजार से ज्यादा फोटो अपलोड किए जा चुके हैं, जिसमें प्रत्येक गड्ढे या संरचना को एक फोटो के रूप में दर्ज किया गया है। इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा गया। जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति और एडिशनल सीईओ एमपी सिंह ने शिक्षकों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य मैदानी कर्मचारियों को भी इससे जोड़ा। उन्हें अपने घरों और गांवों में जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई। अभियान जिले की 390 ग्राम पंचायतों में चल रहा है। इनमें गोहपारू जनपद की ग्राम पंचायतों की भूमिका सबसे सक्रिय मानी जा रही है। जनप्रतिनिधियों को भी अभियान में शामिल कर इसे जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की गई। जनप्रतिनिधियों को भी अभियान में शामिल कर इसे जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की गई। ग्रामीण इलाकों में अब पुराने तालाबों का गहरीकरण, कुओं की सफाई, खेत तालाब और वर्षाजल संरक्षण के छोटे-छोटे ढांचे साफ दिखाई देने लगे हैं। कई गांवों में ग्रामीण खुद श्रमदान कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि “कैच द रेन, व्हेयर इट फॉल, व्हेन इट फॉल” थीम पर चल रहे इस अभियान का उद्देश्य केवल संरचनाएं बनाना नहीं, बल्कि लोगों में पानी बचाने की स्थायी सोच विकसित करना है।
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शहडोल जल संरक्षण में देश के शीर्ष 10 जिलों में:सुबह 10 बजे वीडियो कॉल, शाम 7 बजे रिपोर्ट से मिली सफलता
















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