लखनऊ
यूपी के नगर निगमों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। नगर निगमों ने पिछले वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक कमाई की है। नगर निकाय निदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल राजस्व संग्रह 4439.32 करोड़ रुपये (2024-25) से बढ़कर 5850.05 करोड़ रुपये (2025-26) तक पहुंच गया। अब इसी हिसाब से नगर निगमों को विकास का पैसा भी जारी होगा। इसमें गोरखपुर ने बाजी मार ली है।
राजस्व वृद्धि के मामले में गोरखपुर नगर निगम ने पूरे प्रदेश में अव्वल स्थान हासिल किया है। गोरखपुर नगर निगम ने पिछले वर्ष की तुलना में 109% की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद मथुरा-वृंदावन (66%) और वाराणसी (64%) का स्थान है। मेरठ नगर निगम 30 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ प्रदेश के 17 नगर निगमों में आठवें स्थान पर आया है। मेरठ में वित्तीय वर्ष 2025-2026 में कुल राजस्व वसूली 205.44 करोड़ की हुई है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 158.08 करोड़ की हुई थी। हालांकि ओवरऑल राजस्व वसूली में लखनऊ नगर निगम प्रदेश में सबसे आगे रहा, जहां 1663.02 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हुई है।
शाहजहांपुर और सहारनपुर में हुई सबसे कम वृद्धि
17 नगर निगमों में सबसे कम राजस्व वृद्धि शाहजहांपुर और सहारनपुर जैसे नगर निगमों में हुई। शाहजहांपुर में मात्र तीन प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल राजस्व वसूली 30.14 करोड़ की हुई। सहारनपुर में 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल राजस्व वसूली 70.62 करोड़ रुपये की हुई।
मुरादाबाद नगर निगम में लंबित पड़े जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के 800 आवेदन
सीएसआर पोर्टल की सुस्ती से नगर निगम में 800 से अधिक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र अटके हैं। पोर्टल न चलने के कारण आवेदकों की भीड़ नगर निगम कार्यालय में जमा हो रही है मगर उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर, एक जोन में रजिस्ट्रार के न होने से आवेदकों की परेशानी और बढ़ गई है। आवेदनों का समय से सत्यापन नहीं हो पा रहा है और प्रमाणपत्रों पर रजिस्ट्रार की मुहर नहीं लग पा रही है। नगर निगम के कार्यालय में करीब 35 आवेदक पहुंचे, जिनको जन्म अथवा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पंजीकरण कराना था मगर पोर्टल न चलने से वापस लौटना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि साइट न चलने से यह दिक्कत आ रही है, वहीं महानगर में जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के 800 से अधिक आवेदन नगर निगम के सीएसआर पोर्टल पर लंबित हैं। इनका प्रमाण पत्र पोर्टल चालू नहीं होने से जारी नहीं हो पा रहा है। कुछ मामलों में पोर्टल की वजह से दिक्कत आ रही है तो वहीं कुछ मामलों में रजिस्ट्रार के न होने से लोग परेशान हैं।















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