![]()
भास्कर न्यूज|भरनो सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के सभागार में शनिवार को शिशु वाटिका खंड की अभिभावक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नौनिहालों के शैक्षणिक, मानसिक, शारीरिक व संस्कारात्मक विकास को लेकर अभिभावकों और विद्यालय परिवार के बीच समन्वय स्थापित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य व उपस्थित अभिभावकों द्वारा सामूहिक रूप से ओंकार ध्वनि के साथ किया गया। गोष्ठी में शिशु वाटिका के भैया-बहनों के पठन-पाठन, अनुशासन, व्यवहारिक शिक्षा व उनके समग्र विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इस अवसर पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सुवर्णप्राशन के महत्व पर भी अभिभावकों को जानकारी दी गई। बताया गया कि प्रारंभिक अवस्था में बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार, संस्कारयुक्त वातावरण और नियमित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में आचार्या पूनम सारंगी ने अभिभावक गोष्ठी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में विद्यालय और अभिभावकों की संयुक्त जिम्मेदारी होती है। यदि दोनों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे तो बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव हो पाता है। गोष्ठी में इसीसी व नई शिक्षा नीति (NEP) के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। अभिभावकों को बताया गया कि नई शिक्षा नीति में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को गतिविधि आधारित व संस्कारयुक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता का विकास हो सके। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेश कुमार राय ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए विद्यालय की शैक्षणिक योजनाओं व शिक्षा के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों के विकास में घर का वातावरण और अभिभावकों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के नियमित अध्ययन, अनुशासन, समय प्रबंधन व नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान देने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन व शांति मंत्र के साथ गोष्ठी का समापन किया गया। मौके पर सीके शर्मा, प्रकाश राम, विवेक केशरी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।
Source link
अभिभावकों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है : प्रधानाचार्य














Leave a Reply