फंड की कमी से 12 पुल की योजनाओं को स्वीकृति नहीं




​विभागीय आंकड़ों के अनुसार निम्नलिखित प्रमुख स्थलों पर पुल निर्माण के प्रस्ताव लंबित हैं। क्र.सं. विधानसभा क्षेत्र प्रस्तावित पुल निर्माण स्थल अनुशंसाकर्ता 1. सिमडेगा पालकोट-मरदा टिकुल पतराटोली के बीच नदी पर भूषण बाड़ा (विधायक) 2. गुमला नवाडीह-औराटोली खटवा नदी पर स्थानीय विधायक 3. बिशुनपुर सेरका-केचकी के बीच नदी पर चमरा लिंडा (विधायक सह मंत्री) 4. घाघरा कदमटोली से धोबनी के बीच नदी पर- मंत्री चमरा लिंडा 5. सिसई एनएच-23 से पंडिया रोड पारस नदी पर- जिग्गा सुसारण होरो 6. रायडीह भेलवाडीह से सलकाया पालामाड़ा नदी पर- भूषण तिर्की 7. तेलया- पोगरा तेलया नदी पर पुल निर्माण- 8. सिसई नवाटोली-रोपोटोली कोयल नदी पर- जिग्गा सुसारण होरो 9. चैनपुर साफी नदी पर पुल निर्माण- भूषण तिर्की 10. गुमला डुमरडीह पड़कीटोली रोड स्थित नौडीहा में भूषण तिर्की 11. गुमला महुआटोली से झरगांव के बीच नदी पर भूषण तिर्की ​भास्कर न्यूज|गुमला ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा तैयार की गई 15 करोड़ रुपए से बननेवाली 12 महत्वपूर्ण पुल निर्माण योजनाओं को फंड की कमी के कारण छह माह से स्वीकृति नहीं मिल सकी है। कार्यपालक अभियंता द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के नवंबर महीने में प्राक्कलन बनाकर सरकार को भेजा गया था, लेकिन राशि आवंटित न होने के कारण इन्हें अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ​इन पुलों के निर्माण से जिले के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलती। इन सभी 12 पुल के निर्माण के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुरजोर अनुशंसा की थी। संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों और राज्य सरकार के आदिवासी कल्याण मंत्री चमड़ा लिंडा द्वारा प्रस्ताव विभाग को भेजा गया था। इसके बावजूद, वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई। ​स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिन में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ जाने से दर्जनों गांवों का प्रखंड और जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट जाता है। बच्चों को स्कूल, मरीजों को अस्पताल और आम लोगों को बाजार तथा प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। कई जगहों पर तो लोग जान जोखिम में डालकर उफनती नदियों को पार करने को मजबूर हैं। ​ ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रभावित ग्रामीणों ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि जनहित को देखते हुए इन योजनाओं के लिए तत्काल विशेष फंड उपलब्ध कराया जाए, ताकि मॉनसून से पहले या उसके तुरंत बाद काम शुरू हो सके और लोगों को इस बारहमासी संकट से मुक्ति मिल सके।



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