भास्कर न्यूज| चाईबासा चक्रधरपुर प्रखंड की सुरुबुढ़ा पंचायत में ब्राह्मणी नदी पर 45 साल पहले बने ब्राह्मणी डैम अब खेतों को पानी नहीं दे पा रहा है। इसका एक मात्र कारण है बियर के मेन गेट के पास भारी तादाद में गाद जम गया है। इस गाद को निकाले बिना कैनाल पर ही पांच साल पहले जल संसाधन विभाग ने 11 करोड़ रुपए का कैनाल बना दिया है। यह कैनाल भी अब जगह जगह फट चुका है। हैरानी कि बात यह कि कैनाल बनने के बाद बाहरमासी पानी अब खेतों में नहीं पहुंच रही है। जिसके कारण बारहमासी धान गेहूं की खेती अब किसान नहीं कर रहा है। इस बियर के पानी से कैनाल बनने से पहले 5 हजार हेक्टयर में गेंहूं की खेती व गरमा धान की खेती होती थी। इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक सुखराम उरांव ने सदन में भी बात रखी थी। ब्राह्मणी नदी से गाद निकाले बिना कैनाल का निर्माण होना जांच का विषय है। अस्सी के दशक में बने इस डैम में पिछले 40 सालों से भारी मात्रा में गाद (मिट्टी/मलबा) जमी हुई है। नियमानुसार पहले डैम से गाद हटाई जानी चाहिए थी ताकि जल संग्रहण क्षमता बढ़ सके। लेकिन विभाग ने मुख्य समस्या (गाद) को छुए बिना ही, 11 करोड़ 30 लाख रुपए की लागत से 11 किलोमीटर लंबी कैनाल (नहर) का काम किया है। जो बनकर पूरा भी नहीं हुआ है। द्वारपारम से कैनाल पक्कीकरण शुरु हुआ है। जो जारकी बांझीकुसूूम गांव तक आकर काम रूक गया है। अगर इस बियर (डैम) की जलक्षमता बढ़ाई जाती है, तो केरा, बाइपीड़, असनतलिया,जारकी से लेकर कोलचोकड़ा, देवगांव आदि क्षेत्रों की लगभग 1500 हेक्टेयर कृषि भूमि को सालों भर पानी मिलेगा। 90 के दशक में यहाँ साल में दो फसलें (रबी और खरीफ) होती थीं। अब कैनाल बनने के बाद पानी नहीं पहुंच रही है। इसका कारण है कि जमीन से भी ऊपर कैनाल बना दिया गया है। गेट लिकेज है। मेन गेट से कैनाल तक पानी गाद होने के कारण नहीं पहुंच रही है।
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बिन पानी के खेत… गाद निकला ही नहीं कैनाल के नाम पर खर्च किया















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