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सिटी रिपोर्टर | बोकारो आनंद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित धर्म महासम्मेलन के तृतीय दिवस के प्रातः कालीन सत्र में हजारों साधकों को संबोधित करते हुए आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानन्द अवधूत ने कहा कि संसार के अधिकांश संबंध समय और परिस्थितियों पर आधारित होते हैं, जबकि वास्तविक अर्थों में मनुष्य का सच्चा बन्धु, सुहृद और सखा केवल परमपुरुष तथा धर्म हैं। उन्होंने कहा कि बन्धु वह है जो वियोग सहन न कर सके, सुहृद वह है जो सदैव अनुकूल रहे, मित्र वह जो समान कार्य में सहभागी हो तथा सखा वह जिसके प्राण अपने प्राणों के समान हों। आचार्य विश्वदेवानन्द ने कहा कि संसार में कोई भी संबंध स्थायी नहीं है। मृत्यु के समय श्मशान तक साथ जाने वाले लोग भी अंततः लौट आते हैं, इसलिए वास्तविक बन्धु केवल जगत्-बन्धु परमपुरुष हैं, जो कभी साथ नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि मतभेदों से भरे इस संसार में कोई व्यक्ति पूर्ण रूप से सुहृद नहीं हो सकता। केवल धर्म ही ऐसा सच्चा सुहृद है जो मृत्यु के बाद भी मनुष्य के साथ रहता है। उन्होंने धर्मनिष्ठ राजा की कथा सुनाई, जिसने अपने वचन और धर्म की रक्षा के लिए अलक्ष्मी की मूर्ति को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि समान कार्य करने वाले लोग मित्र कहलाते हैं, लेकिन सखा का संबंध उससे कहीं अधिक गहरा होता है। उन्होंने साधकों को स्मरण कराया कि परमपुरुष सदैव उनके साथ हैं। जो शक्ति सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन कर रही है, वही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की भी संरक्षक है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी साधकों का आह्वान किया कि वे धर्म को सुदृढ़ बनाएं, क्योंकि धन, वैभव, संबंध और मित्र बदल सकते हैं, परंतु धर्म ही वह अमूल्य साथी है जो जीवन और मृत्यु दोनों अवस्थाओं में मनुष्य का साथ निभाता है।
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परमपुरुष हमेशा साधकों के साथ रहते हैं, वही सच्चा सखा : आचार्य















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