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भास्कर न्यूज | बागडेहरी जामताड़ा जिले के कुंडहित प्रखंड अंतर्गत अंबा पंचायत के अंबा गांव निवासी अरिंदम चक्रवर्ती आज अपनी वैज्ञानिक बागवानी और आधुनिक खेती के दम पर जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी नई पहचान बना रहे हैं। बीकॉम की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरी की राह छोड़ खेती को अपना पेशा बनाया और मेहनत, तकनीक तथा नवाचार के सहारे सफलता की ऐसी मिसाल कायम की, जो आज कई किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। करीब पांच वर्ष पूर्व अरिंदम ने अपने बागवानी क्षेत्र में 100 लीची के पौधे लगाए थे। शुरुआत में यह एक प्रयोग की तरह था, लेकिन वैज्ञानिक पद्धति, नियमित देखभाल और उचित प्रबंधन के कारण आज वही पौधे उनकी आमदनी का मजबूत स्रोत बन चुके हैं। इस वर्ष उनके बाग से लगभग 25 क्विंटल लीची का उत्पादन हुआ है। बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के कारण स्थानीय बाजारों के साथ-साथ दूरदराज के क्षेत्रों में भी इसकी अच्छी मांग बनी हुई है। खेती में सफलता के लिए तकनीक और धैर्य जरूरी अरिंदम बताते हैं कि खेती में सफलता केवल मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि सही तकनीक, वैज्ञानिक सोच और धैर्य भी बेहद जरूरी है। उन्होंने पौधों की सिंचाई, खाद प्रबंधन, रोग नियंत्रण और मौसम के अनुसार देखभाल के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया। यही वजह है कि उनकी लीची की खेती आज क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं और उनके बाग का दौरा कर खेती की बारीकियां सीख रहे हैं। 800 से अधिक किस्म के आमों का अनोखा बाग अरिंदम की पहचान केवल लीची उत्पादन तक सीमित नहीं है। उनके बाग में 800 से अधिक अलग-अलग किस्मों के आम के पौधे लगे हुए हैं। इनमें किंग ऑफ चकापात, मियाज़ाकी, ब्लैक स्टोन समेत कई दुर्लभ और महंगे किस्म के आम शामिल हैं। खासकर मियाज़ाकी आम, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है, ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई है। अरिंदम के अनुसार आम और लीची की खेती से उन्हें हर वर्ष 8 लाख रुपये से अधिक की आय हो रही है।
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नौकरी छोड़ वैज्ञानिक खेती अपनाई, अब लीची और आमों से सालाना 8 लाख की कमाई














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