डीसी ने दिए निर्देश… सोलर डीप बोरिंग से बढ़ेगी सिंचाई सुविधा, पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा कुसुम खर्रा




​भास्कर न्यूज|गुमला ​गुमला जिला प्रशासन ने सुदूरवर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ी पहल की है। जिला प्रशासन द्वारा जिले के बेती गांव को एक मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। डीसी दिलेश्वर महतो ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र के हर नागरिक तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि गांव के किसी भी पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) परिवार को सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। गांव में आवास, बिजली, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। बेती गांव में लगभग 450 परिवार निवास करते हैं। इस गांव की खासियत इसकी सामाजिक विविधता है, जिसमें उरांव, बिरहोर, बिरजिया, खिरवार, भुइयां और लोहार सहित विभिन्न समुदायों के लोग आपस में मिल-जुलकर रहते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गांव के 112 परिवार विशेष रूप से पीवीटीजी (पीवीटीजी) श्रेणी से संबंधित हैं। इनमें 62 बिरहोर और 50 बिरजिया परिवार शामिल हैं, जिनकी आजीविका और विकास पर प्रशासन का विशेष फोकस है। गांव का भ्रमण करते डीसी (फाइल फोटो)। ​ग्रामीणों से संवाद करते हुए डीसी दिलेश्वर महतो ने उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा आपकी मेहनत और लगन ने इस गांव को एक अलग पहचान दी है। यहां के लोग खेती और वैकल्पिक आजीविका के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। गांव में मटर सहित अन्य नगदी फसलों की अच्छी खेती की संभावनाओं को देखते हुए डीसी ने भरोसा दिलाया कि यहां के कृषि उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग के लिए एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) के माध्यम से पूरा सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने गांव में एमपीसी (मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी/कमेटी) गठन के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक पहल करने की बात कही और आंगनबाड़ी से जुड़ी दिक्कतों को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया। ​ग्रामीणों ने खेती को सुदृढ़ करने के लिए नदी से खेतों तक सोलर आधारित जलापूर्ति और डीप बोरिंग की पुरजोर मांग रखी। ग्रामीणों ने डीसी को गांव के विभिन्न हिस्सों में सिंचाई संकट से अवगत कराया। ​इन स्थानों पर है सोलर डीप बोरिंग की जरूरत सुकुआ टांड़, हीरा खाड़ टांड़, लालझी बगीचा, कुम्हार टोला, स्कूल टोली, मुइया बड़ा, सरना चौरा, बैजू टांड़, करंज टांड़, महुआ टांड़, पिपरा टांड़ और फकीर टोला। इसके अलावा ग्रामीणों ने सरना चौरा नदी की मरम्मत, गार्डवाल निर्माण, धारा कूटा तालाब के जीर्णोद्धार, जर्जर सड़क की समस्या, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी जिला प्रशासन के सामने रखी। ​मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसी ने मौके पर अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र के अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को माइनर इरिगेशन (ME) के कार्यपालक अभियंता को अविलंब पूरा करने का आदेश दिया। ​इसके साथ ही क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तरी कोयल नदी क्षेत्र में स्थित कुसुम खर्रा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर काम शुरू करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। उपायुक्त ने दोहराया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाकर ही जिले का वास्तविक विकास संभव है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *