‘गेस्ट’ का दाग हटाने 12 हजार टीचर तैयार, चार हजार करोड़ रुपये छोड़ने का फैसला

चंडीगढ़.

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पिछले करीब 20 साल से बच्चों को पढ़ा रहे 12 हजार गेस्ट टीचर्स आज भी अपने ही भविष्य की कक्षा के बाहर खड़े हैं। दो दशक की सेवा और हजारों बच्चों का भविष्य संवारने के बाद भी उनकी पहचान के आगे ‘गेस्ट’ शब्द लगा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इसी प्रदेश में समान परिस्थितियों में काम करने वाले करीब पांच हजार गेस्ट लेक्चरर्स नियमित हो सकते हैं, तो स्कूलों के गेस्ट टीचर्स के लिए ऐसा भेदभाव किसलिए हो रहा है। वर्ष 2014 में नियमितीकरण की मांग को लेकर इन शिक्षकों ने दिल्ली में आंदोलन किया था। उसी समय भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में सत्ता में आने पर पहली कलम से गेस्ट टीचर्स को पक्का करने का वादा किया था। भाजपा की सरकार बनी, साल गुजरते गए, लेकिन वादा अधूरा रहा। 2019 में भाजपा सरकार ने गेस्ट टीचर्स को 58 वर्ष तक सेवा का लाभ और नियमितीकरण की इच्छा जताई, मगर कोर्ट केस को अड़चन बताया गया। अब वही अड़चन काफी हद तक दूर हो चुकी है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट गेस्ट टीचर्स के पक्ष में आदेश दे चुका है और उसके विरुद्ध अपील भी खारिज हो चुकी है। इसके बावजूद करीब 12 हजार शिक्षक नियमितीकरण के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा में हैं। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि स्कूल और कॉलेजों में अस्थायी आधार पर काम करने वाले शिक्षकों की व्यवस्था में कई समानताएं होने के बावजूद दोनों के साथ अलग व्यवहार हुआ। कॉलेजों में कार्यरत करीब पांच हजार गेस्ट लेक्चरर्स नियमित हो गए, लेकिन स्कूलों के 12 हजार गेस्ट टीचर्स को आज भी स्थायी दर्जा नहीं मिला। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता कर समस्या के स्थाई समाधान के संकेत जरूर दिए हैं, मगर अभी कोई समाधान नहीं निकला है।

इस तरह समझिये गेस्ट टीचर्स का दर्द

  • करीब 12 हजार गेस्ट टीचर्स
  • करीब 20 साल की सेवा
  • 2014 में नियमितीकरण का चुनावी वादा
  • 2019 में 58 वर्ष तक सेवा का लाभ
  • 2026 में हाई कोर्ट से राहत
  • करीब 5 हजार अगले तीन साल में रिटायर
  • बाकी बचे करीब 7 हजार अगले आठ से नौ साल में रिटायर

संघर्ष का मार्मिक पहलू
भावनात्मक गेस्ट टीचर्स के इस संघर्ष का सबसे मार्मिक पहलू आर्थिक नहीं, भावनात्मक है। हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक गेस्ट टीचर्स का पिछला करीब चार हजार करोड़ रुपये का एरियर बनने का दावा है। लेकिन गेस्ट टीचर संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी डा. अजय लोहान का कहना है कि शिक्षक यह पूरा आर्थिक लाभ छोड़ने तक को तैयार हैं। उन्हें 2014 से मिलने वाले लाभ की जगह 2019 से लाभ मिल जाए, तब भी वे तैयार हैं। यहां तक कि ज्वाइनिंग डेट से वरिष्ठता और 2014 में नियमित कर्मचारियों के बराबर नया वेतनमान मिलने पर भी वे संतुष्ट हैं।

हाई कोर्ट के फैसले से हुई सरकार की राह
आसान अपने नियमितीकरण की लड़ाई लड़ रहे गेस्ट टीचर्स के सभी संगठन एकजुट हो चुके हैं। गेस्ट टीचर्स संगठनों के प्रधान मैना यादव, कुलदीप झरोली, कृष्ण धारसूल, राजेंद्र शास्त्री, पारस शर्मा और नरेंद्र संधू का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार के लिए फैसला लेना आसान हो गया है। 2019 में 58 वर्ष तक सेवा का लाभ देने के बाद सरकार ने खुद उनकी सेवाओं को स्वीकार किया था। अब गेस्ट टीचर्स को नियमित करने में कोई बाधा नहीं है। चार हजार करोड़ के सामने 32 करोड़ मामूली खर्च हरियाणा सरकार द्वारा कराए गए एक आंतरिक आकलन के अनुसार नियमितीकरण से सरकार पर करीब 32 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा। यानी अतिथि शिक्षक हजारों करोड़ का कथित पिछला लाभ छोड़ने को तैयार हैं और सरकार के सामने अतिरिक्त खर्च का आंकड़ा अपेक्षाकृत बहुत छोटा है।

प्रदेश सरकार के सामने ये उठ रहे सवाल –

  • जब कॉलेजों के गेस्ट लेक्चरर्स नियमित हो सकते हैं, तो स्कूलों के गेस्ट टीचर्स क्यों नहीं?
  • जब हाई कोर्ट से राहत मिल चुकी है, तो फैसला कब?
  • शिक्षक 4 हजार करोड़ के लाभ छोड़ने को तैयार हैं, तो समाधान में अड़चन क्या है?
  • जिस शिक्षक ने पूरी जिंदगी बच्चों का भविष्य पक्का किया, तो उनके भविष्य को पक्का करने का फैसला क्यों नहीं?

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